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अखिल भारत हिन्दू महासभा ने दिया 25 सितंबर के किसान भारत बंद को समर्थन


दिल्ली , (ग्लोबल न्यूज़) अखिल भारत हिन्दू महासभा ने देश भर के किसानों की ओर से 25 सितंबर के भारत बंद के किया आह्वान को समर्थन दिया है। महासभा ने कहा कि भारत सरकार की ओर से अलग अलग किसान आर्डीनेंसों के माध्यम से कृषि सेक्टर को अगर कारपोरेट घरानों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास गिरवी रखा जाता है तो अखिल भारत हिन्दू महासभा इस का पूर्ण विरोध करते हुए किसानों के राष्ट्र व्यापी आंदोलन को समर्थन करती है।

अखिल भारत हिन्दू महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष राज्यश्री चौधरी और महासभा के किसान विंग अखिल भारत हिन्दू किसान सभा के अध्यक्ष ओम चौधरी और राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य पंकज शर्मा  ने कहा कि भारत की भाजपा सरकार को किसी भी कीमत पर किसानों के आर्थिक भविष्य के साथ खिलवाड करने की इजाजत नही दी जा सकती है। साथ ही महासभा चाहती है कि किसानों के सभी उत्पादों की खरीद सरकार करके और किसानों के सभी उत्पादों के रेट डा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार तय होने चाहिए।  किसानों की ओर से अपने उत्पाद बेचने में बिचौलियों की भूमिका को पूर्ण रूप में खत्म किए जाने की भी महासभा माग करती है। किसानों के उत्पादों का मंडीकरण सहकारी सभाओं के माध्यम से किए जाने की सरकार व्यवस्था करे। जिन सभाओं के उपर सरकार का पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए। महासभा की मांग है कि किसानों की समाजिक सुरक्षा को भारत सरकार यकीनी बनाए। उनके परिवारों के बच्चों की शिक्षा और सेहत की व्यवस्था सरकार करे।किसानों की फसलों की बिजाई आर्गेनिग ढंग से करवाने के लिए सरकार योजना को लागू करके और देश भर के सभी किसानों की पहचान के  भारत सरकार की ओर से पंजीकरण व्यवस्था की जाए। किसानों के उत्पादों के सही रेट के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी सभाओं को मजबूत बनाया जाए।

हिन्दू महासभा नेताओं ने कहा कि  आर्डीनसों के अनुसार अगर कोई कारपोरेट घराना किसानों के साथ धोखा करता है तो किसान ज्यूडिशिरी का सहारा नही ले सकते है, आर्डीनेंस की यह मद पूरी तरह नैचुरल ला आफ जस्टिस के खिलाफ है। किसानों की अगर फसल तबाह हो जाती है तो इस के लिए कारपोरेट कंपनी और कंट्रेक्ट करने वाली कंपनियों की मो भी जिम्मेवारी नही होगी यह भी किसान विरोधी फैसला है। किसानों की फसलों के रेट व्यपारी अपनी मर्जी के अनुसार तय करेंगे यह भी किसानों को मंजूर नही है। उन्होंने कहा कि सरकार को आपने आर्डीनेसों में सुधार करना चाहिए और इस से पहले किसान संगठनों के प्रतिनिधियों की साथ बैठक करके उनके सुझाव लेकर ही उनके अनुसार संशोधन करे।

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