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आढ़तियों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बनते ढाई प्रतिशत कमीशन को बहाल करने की मांग


चंडीगढ़, (गुरप्रीत ) :पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली मंत्री राम विलास पासवान से माँग की है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के 2.5 प्रतिशत संबंधी आढ़तियों के कमीशन के कानूनी उपबंध को बहाल किया जाये और यह भी चेताया कि मौजूदा नीति से किसी भी तरह पीछे हटने से धान की खरीद प्रक्रिया में गंभीर रुकावट आ सकती है।

यह महसूस करते हुए कि रबी खरीद सीजन के लिए मुहैया किया गया एक समान कमीशन, न्यूनतम समर्थन मूल्य के 2.5 प्रतिशत के कानूनी उपबंधों के उलट है, कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्रीय मंत्री से माँग की कि रबी के मार्किटिंग सीजन 2020-21 के लिए अस्थायी दर तालिका में संशोधन किया जाये जोकि भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की तरफ से जारी की गई है। इस तालिका के अनुसार आढ़तियों का कमीशन एक फ्लैट दर 46 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से निर्धारित किया गया है जो कि वास्तविक खर्चे के कुछ अनुमानों पर निर्धारित किया लगता है।

केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस मुद्दे को लेकर आढ़तियों में बेचैनी पाई जा रही है और यदि इस मुद्दे को इसी वक्त सुलझाया न गया तो इसी कारण खरीफ मंडीकरण सीजन 2020-21 के दौरान धान की खरीद प्रक्रिया पर बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा है कि आढ़तियों को अदा किये जाने वाले कमीशन की मौजूदा प्रथा, ‘द पंजाब एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्किटिंग एक्ट, 1961’ और इसके अंतर्गत बनाए नियमों के कानूनी उपबंधों द्वारा संचालित होती है। उन्होंने आगे लिखा कि ‘द पंजाब एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट् (जनरल) रूल्ज, 1962’ के नियम 24 ए के अंतर्गत यह कमीशन गेहूँ / धान की बिक्री कीमत के 2.5 प्रतिशत की दर से अदा किया जाना निर्धारित किया गया है।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आगे लिखा है कि कोविड-19 महामारी के निष्कर्ष के तौर पर राज्य की अर्थव्यवस्था के समूचे क्षेत्रों के उत्पादन और खपत मापदण्डों में रुकावट आने के कारण पंजाब पहले ही गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। सभी समस्याओं के बावजूद रबी खरीद सीजन 2010-21 के दौरान आढ़तियों ने निर्विघ्न खरीद यकीनी बनाने में बेहद अहम योगदान दिया है। इससे ऑपरेशनल स्टॉक और एफ.सी.आई. के खाद्य सुरक्षा भंडार /आरक्षित भंडार के सभ्यक प्रबंध यकीनी बने हैं जिसके निष्कर्ष के तौर पर भारत सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पी.एम.जी.के.ए.वाई.) और ‘आत्मनिर्भर भारत’ स्कीम के अंतर्गत अनाज का वितरण खुले हाथ से करने में सक्षम हो पाई है।

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