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एफजीडी इंस्टॉलेशन समय सीमा का फिर से निर्धारण हो:पावर प्रोड्यूसर्


चंडीगढ , ( गुरप्रीत) : एसोसिएशन ऑफ पावर प्रोड्यूसर्स (एपीपी) ने फ्ल्यू गैस डिसल्फराइजेशन (दहन गैस निर्गंधकीकरण-एफजीडी) इंस्टॉलेशन समय सीमा का फिर से निर्धारण करने की मांग की है। राज कुमार सिंह, विद्युत, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री को एपीपी के महानिदेशक अशोक खुराना ने एक पत्र में कहा है कि सीईए वेबसाइट पर उपलब्ध एफजीडी क्रियान्वयन की वस्तुस्थिति से संबंधित नवीनतम आंकड़ों से यह चिंता सामने आई है कि बहुत से कोल थर्मल पावर प्लांट (टीपीपी) कई अलग-अलग कारणों से, जो प्रत्येक इकाई/स्टेशन के लिए भिन्न हैं, इसका अनुपालन करने में अक्षम हैं और अपनी समय सीमा से चूक सकते हैं।

ध्यान देने की बात है कि कुल टीपीपी इकाइयां जहां एफजीडी की स्थापना होनी है उनमें से 77 प्रतिशत (51 प्रतिशत केंद्रीय, 99 प्रतिशत राज्य स्तरीय और 85 प्रतिशत निजी टीपीपी) ने अब तक इंजीनियरिंग प्रोक्युर्मन्ट व कन्स्ट्रक्शन (ईपीसी) अनुबंध नहीं किए हैं। बहुत हद तक संभावना है कि ये टीपीपी एफजीडी इंस्टॉलेशन की समय सीमा से चूक जाएंगे। साथ ही, चरणबद्ध योजना के तहत 31 दिसंबर, 2020 तक 37.61 गीगावाट एफजीडी की कमीशनिंग का लक्ष्य था, जिसमें से केवल 1.7 गीगावाट के टीपीपी ने अपना लक्ष्य हासिल किया है। करीब 36 गीगावाट के टीपीपी दिसंबर, 2020 की समयसीमा का लक्ष्य चूक जाएंगे, जिससे पहले से ही दबाव में चल रही एफजीडी आपूर्ति श्रृंखला पर और ज्यादा दबाव पड़ेगा।

केंद्र, राज्य और निजी टीपीपी की ओर से इतने बड़े पैमाने पर डिफॉल्ट होने का यह अर्थ नहीं है कि उत्पादक कंपनियों ने इनकी अनदेखी की है या उनके प्रयास में कोई कमी रह गई है, बल्कि ऐसा मौजूदा प्रणालीगत बाधाओं - नियामकीय मुश्किलें और एफजीडी इंस्टॉल करने के लिए मौजूदा व नए निवेश के रूप में नकदी प्रवाह की अनिश्चितता के कारण पावर सेक्टर में अतिरिक्त ऋण देने के प्रति बैंकों में  उदासीनता है, वह भी ऐसे हालात में, जब अगस्त, 2019 से ही डिस्कॉम्स पर कई टीपीपी का बड़ा बकाया है, और अप्रत्याशित महामारी में यह संकट कई गुना बढ़ गया है।

साथ ही, समय सीमा चूकने का खतरा हाल में दो कारणों से और बढ़ गया है - पहला, कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधा का असर और दूसरा, हाल के दिनों में हुए टकराव के कारण चीन की कंपनियों के उत्पाद का बॉयकाट करने की उभरती भावना (चीन एफजीडी उपकरणों का सबसे बड़ा और किफायती आपूर्तिकर्ता है)।

इस संदर्भ में, इस पर विचार होना चाहिए कि समय सीमा को 2-3 साल के लिए आगे बढ़ाना प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अपील के अनुपालन का श्रेष्ठ अवसर हो सकता है, जिसमें करीब 48,000 करोड़ रुपये की (120,722 मेगावाट की क्षमता के आधार पर, जिसके लिए टेंडर किसी को नहीं दिया गया है) मैन्यूफैक्चरिंग ऑर्डर बुक घरेलू उद्यमों के लिए खोली जा सकती है।

इसलिए हमारा अनुरोध है कि विद्युत मंत्रालय , पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और सीईए के अधिकारियों की एक कमेटी गठित की जाए जो प्रत्येक टीपीपी की समीक्षा करे और प्रत्येक टीपीपी के लिए उसकी प्रगति की स्थिति के आधार पर संशोधित समयसीमा का सुझाव दे। कमेटी को पहले घरेलू एफजीडी मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता और उसे बढ़ाने के संबंध में व्यापक आकलन कर लेना चाहिए, जिससे समयसीमा बढ़ाने के बारे में सटीक आकलन किया जा सके।

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