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कोविड-19 रिपोर्ट घोटाले की स्वतंत्र जांच की मांग की


कहा कि मुख्य सचिव के आदेश पर केस सतर्कता विभाग से वापिस लेकर अमृतसर पुलिस को सौंपने से सरकार पर से लोगों का विश्वास डगमगा गया है

मुख्यमंत्री से तुली लैब और ईएमसी अस्पताल के प्रबंधन सहित सभी दोषियों पर केस दर्ज करने के लिए हस्तक्षेप करने को कहा

चंडीगढ़(गुरप्रीत) : शिरोमणी अकाली दल ने आज फर्जी कोविड-19 रिपोर्टों के घोटाले की केंद्रीय एजेंसी यां पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के किसी मौजूदा जज से स्वंतत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि राज्य के मुख्य सचिव के हाल ही के आदेश ने सतर्कता विभाग से जांच वापिस लेकर अमृतसर पुलिस को सौंपने से कांग्रेस सरकार में लोगों का विश्वास डगमगा गया है।

यहां एक प्रेस बयान जारी करते हूए पूर्व मंत्री सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि तुली डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी और ईएमसी अस्पताल को बचाने के लिए कांग्रेसियों द्वारा ठोस प्रयास किए जा रहे थे। जिन्होने कोविड-19 निगेटिव मरीजों को पॉजिटिव बताकर मानवता के खिलाफ अपराध किया था और उनसे लाखों रूपए ऐंठने के एकमात्र उद्देश्य से आइसोलेशन सेंटरों पर कोविड-19 पॉजिठिव मरीजों को रखा था।

सरदार मजीठिया ने कहा कि इस आपराधिक कृत्य ने अमृतसर के लोगों को गहरा आघात पहुंचाया है जो इस भयावह घटना के लिए दोषी लोगों के खिलाफ अनुकरणीय कार्रवाई की उम्मीद कर रहे थे। अमृतसर पुलिस द्वारा राजनीतिक दबाव के कारण इस मामले में कोई प्रगति विफल रहने के बाद विजीलेंस विभाग को जांच का जिम्मा सौंपा गया था। उन्होेन कहा कि तुली डायग्नोस्टिक सेंटर के मालिकों और इससे जुड़े दो तकनीशियनों के खिलाफ मालिक के साथ साथ ईएमसी अस्पताल के एक डॉक्टर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। उन्होने कहा कि लोग इस बात से हैरान है कि मामले को अंतिम पड़ाव पर ले जाने के बजाय इसे कमजोर करने और दोषी को क्लीन चिट देने का प्रयास किया जा रहा है। यह सब कांग्रेसी नेताओं के इशारे पर किया जा रहा है, जिन्होने सभी के साथ तुली लैब और ईएमसी अस्पताल के मालिकों को राजनीतिक संरक्षण प्रदान किया गया है और इस मामले में किसी भी गिरफ्तारी नही की गई है।

सरदार मजीठिया ने कहा कि इस मामले में ईएमसी अस्पताल के मालिक पंकज सोनी द्वारा दो दिन पहले उच्च स्तरीय अधिकारियों के साथ मीटिंग के बाद मामले में मोड़ आया । उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री के ओएसडी संदीप बाबा संधू ने भी तुली लेबोरेटरी के सेल्ज प्रसन के रूप में काम करने के अलावा जांच में उलटफेर करने में बड़ी भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए सरदार मजीठिया ने कहा कि तुली लैब और  ईएमसी अस्पताल द्वारा पीड़ितों को पहुंचाई पीड़ा अकल्पनीय है और उन्हे किसी भी हालत में छोड़ा नही जाना चाहिए। उन्होने कहा कि नौ महीने की गर्भवती महिला डॉ. अनम खुल्लर को गलत तरीके से तुली लैब द्वारा कोविड-19 पॉजिटिव दिखाय गया तथा उसकी जान को खतरे में डालने वाले मरीजों के साथ पॉजिटिव मरीजों के साथ आइसोलेशन वार्ड में रखा गया । उन्होने कहा कि बाद में गुरु नानक मैडीकल कॉलेज लैब द्वारा दो टैस्टों से यह साबित हो गया कि उन्हे कोविड निगेटिव था। उन्होने कहा कि एक अन्य मामले में प्रीति दत्ता को तुली लैब द्वारा तैयार की झूठी रिपोर्ट के बाद कोविड मरीजों के साथ गलत तरीके से रखा गया था। उन्होने कहा कि इंग्लैड से तनेजा परिवार के दो सदस्यों को भी झूठी रिपार्टों के बाद ईएससी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अकाली नेता ने कहा कि हालांकि इन तीन मामलों को विजिलेंस विभाग द्वारा लिखित प्रमाण पत्र दिया गया था, लेकिन ऐसा लग रहा था कि तुली लैब और ईएमसी अस्पताल को कोविड-19 पॉजिटिव बताकर निर्दोष व्यक्तियों से लाखों रूपये ऐंठने का काम कर रहे थे। सरदा मजीठिया ने कहा कि हम इन अपराधियों को कानून के लंबे हाथ से बचने की अनुमति नही देंगे और उन्हे समाज में कानूनी सजा दिलाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे।

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