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किसान विरोधी अध्यादेशों की आड़ में नही कटने देगें किसानों की गर्दन: रतनमान


चंडीगढ़, (अदिति) : भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने भाजपा सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि किसान विरोधी अध्यादेशों की आड़ में किसानों की गर्दन को नही कटने दिया जाएगा। चाहे परिणाम कितने भी गंभीर क्यों न हो? सरकार को वक्त रहते चेत जाना चाहिए। वरना परिणाम गंभीर हो जाएगें। उन्होंने सरकार से एक मात्र मांग करते हुए कहा कि घोषित सर्मथन मूल्य (एमएसपी)पर फसल खरीद गारंटी सहित भूगतान सुनिश्चित का करने का किसान हितैषी अध्यादेश लाकर कानून बनाना चाहिए। जिससे किसानों के हित सुरक्षित रह सके। इसके साथ ही कृषि से संबधित केंद्र के तीनों अध्यादेशों को रद्द किया जाए। भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले शहर की सड़कों पर उतर कर सैंकडो आंदोलित किसानों ने रोष प्रदर्शन करते हुए भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर बवाल काटा। किसानों की मांग है कि अगर सरकार को किसानों के हितों के लिए समर्थन मूल्य पर फसल खरीद गारंटी का कानून नही बनाया तो भाजपा को इसका खामियाजा भूगतना पड़ेगा। पूर्व घोषित कार्यक्रम के मुताबिक अपनी मांगों का अंबाला के सांसद रतनलाल कटारिया को पंचकूला स्थित आवास पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। धरने प्रदर्शन को नेतृत्व अंबाला मंडल अध्यक्ष नरपत राणा शहजाद पुर व प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने अध्यक्षता की। किसानों ने भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों की जमकर आलोचना करते हुए जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन में जिला यमुनानगर, अंबाला व पंचकूला के किसानों ने शिरकत कर अपनी आवाज को बुलंद्व किया। प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि भाकियू के प्रदेश स्तरीय ऐलान के मुताबिक प्रदेश के सभी लोकसभा व राज्य सभा तथा विपक्षी दलों के नेताओं को अगस्त माह के दौरान ज्ञापन सौंपे जा रहे है। इसी कड़ी में हिसार व कुरूक्षेत्र व करनाल के सांसद को ज्ञापन सौंपे जा चुके है। आगामी 17 अगस्त को सिरसा की सांसद सुनीता दुगगल व 23 अगस्त को सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक तथा भिवानी के सांसद धर्मबीर सिंह को ज्ञापन दिए जाएगें। मान ने कहा कि इन मुद्दों को लेकर प्रदेशभर में अगस्त किसान क्रांति आंदोलन शंखनाद किया गया है। यह आंदोलन किसान विरोधी भाजपा सरकार के गले का फांस बनेगा। किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगा कर किसान अपनी आवाज को बुलंद्व करते रहे। प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा सरकार घमंडी नेताओं का टोला है। जो किसानों की बात सुनने के लिए तैयार नही है। इसका खामियाजा सरकार को भूगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र में शासित भाजपा की सरकार खेती किसानी को प्राईवेट सेक्टर के हवाले करके किसानों की गर्दन कारपोरेट लोगों के हाथों में सौंपने की साजिश रच रही है। जिसे किसी भी कीमत पर सफल नही होंने दिया जाएगा। अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसान लामबंद्व होकर किसी भी कुर्बानी देने के लिए तैयार हो रहे है। प्रदेश का किसान अब भाजपा की किसान विरोधी चाल को समझते हुए    जाग रहा है।

अगर अध्यादेश किसान हितैषी है तो मुख्यमंत्री बुलाए सर्वदलीय बैठक

 प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल में किसानों का सामना करने की हिम्मत है तो तीनों अध्यादेशों की स्थिति को स्पष्ट करने हेतू प्रदेश की सभी विपक्षी दलों के नेताओं व कृषि विषशेज्ञों ओर प्रदेश सभी किसान संगठनों की सांझी बैठक बुला कर विशेष चर्चा करवाएं। चर्चा के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इसके साथ ही अध्यादेशों के प्रति पनप रहे रोष समाप्त होंने के साथ साथ सबका भ्रम भी दूर हो जाएगा।

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