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किसानों से किए वादे के अनुसार धान की पराली का प्रबंधन के लिए 2500 रूपये प्रति एकड़ के जारी करे


चंडीगढ़ (गुरप्रीत): शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज मुख्मयंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से कहा है कि वे धान की पराली के प्रबंधन के लिए सभी धान उत्पादकों को 2500 रूपये प्रति एकड़ जारी करके ‘अन्नदाता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पूरा करें, उन्होने सरकार ने अपनी विफलताओं के लिए किसान को दंडित करने के प्रयासों की निंदा की है।

यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा है कि कांग्रेस सरकार ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार पराली के प्रबंधन के लिए किसानों को 100  रूपये प्रति क्विंटल मुआवजा देने से न केवल इंकार कर दिया था, बल्कि इस साल भी इस मुआवजे की पेशकश करने के लिए राज्य के बजट में कोई प्रावधान नही रखा है। ‘ यह राज्य सरकार की घोर संवेदनहीनता है कि जो किसानों को बोली लगाने के लिए मजबूर करने के लिए धमकियों और यहां तक कि एफआईआर का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन उन्हे सुविधा देने के लिए बिल्कूल तैयार नही है। अकाली दल ने मांग की है कि सरकार पिछले साल के मुआवजे के बकाया को मंजूर करे तथा इस साल किसानों को अग्रिम रूप से धन जारी करे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि धान की पराली को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार प्रबंधित किया जा सके।

कांग्रेस सरकार को शीर्ष अदालत की अवमानना बताते हुए सरदार सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से शर्त रखी थी कि राज्य को केंद्र सरकार के मुआवजा के आने का इंतजार नही करना चाहिए और अपने दम पर जरूरी उपाय करने चाहिए। उन्होने कहा कि किसानों को मुआवजा देने में नाकाम रहने के बाद कांग्रेस सरकार ने पिछले साल पराली जलाने के लिए किसानों के खिलाफ 1700 मामले दर्ज किए। ‘ इस साल कांग्रेस सरकार का दावा के अनुसार कि वे सीमा शुल्क केंद्र से पराली का प्रबंधन करने के लिए आवश्यक मशीनों को मुफ्त में लेकर जा सकते हैं को रदद कर दिया है। यह एक ज्ञात तथ्य है कि केंद्र राज्य में धान की पराली का केवल एक अंश का प्रबंधन कर सकते हैं और सरकार फिर से शीर्ष अदालत के साथ साथ किसानों को मूर्ख बना रही है।

सरदार सुखबीर सिंह बादल ने उच्चतम न्यायालय में किसानों को दंडित करने के लिए दिए गए प्रस्ताव पर भी फटकार लगाई कि पूरी प्रक्रिया पूरी होने तक धान की खरीद के लिए उन्हे दिए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य( एमएसपी) का हिस्सा रोककर किसानों को दंडित किया जा सके ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि उन्होने इसका प्रबंधन किया है यां नही। उन्होने कहा कि यह निरर्थक है कि इस तरह के किसान विरोधी प्रस्ताव नवंबर 2019 के शीर्ष अदालत के आदेशों का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के बजाय किए जा रहे थे जिन्होने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों को उन्हे मुआवजा देने का निर्देश देकर किसानों के हितों की रक्षा की थी।

मुख्यमंत्री से किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी करने की मांग करते हुए सरदार बादल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पिछले साल धान के भूसे के प्रबधन उपकरण खरीदने वाले युवाओं को गरीब बना दिया था । ‘ उन्होने कहा कि नौजवानों को उम्मीद थी कि मशीनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा क्योंकि सरकार ने घोषणा की थी कि वह किसानों को धान के प्रबंधन के लिए मुआवजा देगी। लेकिन जब सरकार इस वादे से मुकर गई और सेवाओं का उपयोग करने से इंकार कर दिया तो उन्हे भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होने कहा कि राज्य सरकार अब भी बस बयान जारी कर रही थी कि वह धान की पराली के प्रबंधन के लिए किसानों को मुआवजा देने से दूर भागने के लिए सीमा शुल्क सेंटरों से मशीनरी के किराया मुक्त उपयोग की अनुमति देगी।


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