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खट्टर ने चंडीगढ़ पर अधिकार पर संसद में चर्चा को लिया गंभीरता से


चंडीगढ़ : बीते 9 फरवरी को संसद में पंजाब के कुछ नेताओं की तरफ से चंडीगढ़ पर अधिकार पर की गयी चर्चा को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने काफी गंभीरता से लिया है और ये मुद्दा आने वाले दिनों में शुरू होने वाले विधान सभा सत्र में उठाने का इरादा बनाया गया है। वैसे श्री खट्टर ने एक बार फिर दोहराते हुए कहा है कि ऐसी रजनीतिक चर्चा करने वाले समझ लें कि हरियाणा किसी प्रकार से अपने हक पर किसी को कब्ज़ा नहीं करने देगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि 1966 में पास हुए पंजाब पुनर्गठन एक्ट से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ अस्तित्व में आया था। एक्ट में प्रावधान है कि चंडीगढ़ के 60 प्रतिशत कर्मचारी पंजाब से और 40 प्रतिशत कर्मचारी हरियाणा से होंगे। उसी समय से चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब की राजधानी है और रहेगी भी। चंडीगढ़ पर हरियाणा का हक है और रहेग।

श्री खट्टर ने पंजाब के राजनीतिक दल शिरोमणी अकाली दल की वरिष्ठ नेता हरसिमरत कौर बादल की तरफ से चंडीगढ़ को पंजाब को वापिस सौंपने की मांग को काफी गंभीरता से लिया। संसद में केंद्रीय बजट पर बहस में भाग लेते हुए बठिंडा की सांसद ने कहा था कि ‘‘ देश के प्रत्येक राज्य की अपनी राजधानी है, जो इसकी जीडीपी में में 30 से 40 फीसदी योगदान देती है’’। उन्होने कहा कि पंजाब एकमात्र ऐसा राज्य है, जिसकी अपनी राजधानी नही है इसीलिए तुरंत स्थिति सुधार करने की मांग की। बादल ने कहा कि पंजाब इसीलिए भी पीड़ित है, क्योंकि ग्रामीण विकास कर लागू करने की आजादी के बावजूद केंद्र ने 3000 करोड़ रूपये के संचित ग्रामीण विकास कोष (आरडीएफ) को रोक दिया है और पंजाब को ब्लैकमेल कर रहा है कि अगर राज्य आरडीएफ चाहता है तो वह अपना कर कम कर दे। विशेष बात ये है कि जब हरसिमरत बदल ये चर्चा कर रही थी तो पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल भी वहां मौजूद थे।


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हिमाचल ने भी ठोका है दावा


हिमाचल प्रदेश सुखविंदर सुक्खू की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने भी चंडीगढ़ पर अपना दावा ठोका है। हिमाचल प्रदेश के उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कुछ दिन पहले चंडीगढ़ पर बयान दिया कि पंजाब पुनर्गठन के बाद हिमाचल चंडीगढ़ की 7.19% जमीन का हकदार है और इसे लेकर रहेंगे। उन्होंने तो सीधे तौर पर चेतावनी दे डाली है कि यदि जरूरत पड़ी तो हम कानूनी कदम भी उठाएंगे। उप मुख्यमंत्री अग्निहोत्री ने कहा कि पंजाब के एक नेता ने कहा कि यह पंजाब व हरियाणा का मसला है, हिमाचल इसे न उठाए, लेकिन पंजाब पुनर्गठन एक्ट में हिमाचल की जनसंख्या, संसाधन और विकास को आधार माना गया है, ऐसे में चंडीगढ़ की प्रॉपर्टी पर हिमाचल का भी हिस्सा बनता है। जरूरत पड़ी तो राजनीतिक मंच पर इस बात को उठाया जाएगा। उनका कहना है कि 27 सितंबर 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत हिमाचल चंडीगढ़ की 7.19% जमीन का हकदार है। पूर्व में आई राज्य सरकारें भी अलग-अलग मंच पर चंडीगढ़ की प्रॉपर्टी पर अपने दावे पेश कर चुकी हैं। पूर्व की जयराम सरकार ने भाखड़ा नंगल पावर प्रोजेक्ट से तैयार होने वाली 7.91% बिजली पर अपना हक जताया था। इस मुद्दे सहित पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान को पानी और बिजली देने की रॉयल्टी के मामले अब सिर्फ बयान और शिगूफे रह गए हैं। कोर्ट तक से फैसले के बाद भी हिमाचल को इसका हक नहीं मिल पाया।

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