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खट्टर द्वारा भू-जल नियंत्रण के लिए राज्य भू-जल व जिला भू-जल योजना तैयार करने की स्वीकृति प्रदान


चंडीगढ़, (अदिति)- हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भू-जल संरक्षण के लिए क्रियान्वित की जा रही ‘‘मेरा पानी-मेरी विरासत’’ योजना के बाद प्रदेश में पानी की एक-एक बूंद बचाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई मिशन प्राधिकरण गठित करने तथा भू-जल नियंत्रण के लिए राज्य भू-जल व जिला भू-जल योजना तैयार करने की स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल को अवसर में बदलते हुए केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के साथ निरंतर वैबिनार से तथा बाद में दिल्ली में मुलाकात कर हरियाणा के लिए 1000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर करवाई है।

एक सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के दिशा निर्देशानुसार हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबन्धन प्राधिकरण ग्रामीण क्षेत्रों के तालाबों के पानी को तीन पोन्ड व पांच पोन्ड प्रणाली से उपचारित कर इसको सिंचाई व अन्य कार्यों के उपयोग के लिए हो इसके लिए योजनाओं पर तेजी से कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि जल शाक्ति मंत्रालय से प्राप्त फण्ड का उपयोग प्रदेश के लगभग 14,000 तालाबों के पानी को उपचारित करने को की जाएगी। सभी तालाबों की जीआईएस मैपिंग कर पोन्ड एटलस तैयार की गई है। इसके पहले चरण में 20 तालाबों को मॉडल तालाब के रूप में विकसित किया जा रहा है।

प्रवक्ता ने बताया कि प्रदूषित तालाबों के पानी को उपचारित करने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो-वाइसचांसलर एवं पर्यावरण वैज्ञानिक प्रोफेसर सी.आर. बाबू की नीला हौज़ जैव-विविधिकरण पार्क, नई दिल्ली पर केस स्टडी के लिए अपनाई गई कन्सट्रक्टिड वेटलैंड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें कचरे को रोकने के लिए तीन व चार स्थानों पर मोटे-मोटे पत्थर डालकर उसके बाद जंगली घास लगाई जाती है और बाद में पानी उपचारित होता है। प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री की सोच है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि हर तालाब को वर्ष में कम से कम एक बार खाली करके इसे पुन: नहरी पानी, बरसात व अन्य स्रोतों से भरा जाए ताकि पानी का संचार होता रहे। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के आधार पर कैथल जिले के क्योडक़ गांव के तालाब का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि हर तालाब की पानी की निकासी के लिए लगाए जाने वाले पम्पों, जहां तक संभव हो सोलर पम्प प्रणाली लगाई जा सके ताकि बिजली की भी बचत हो सके। प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबन्धन प्राधिकरण की आगामी बैठक 25 जुलाई, 2020 को होगी जिसमें मुख्यमंत्री सभी तालाबों के इस प्रौजेक्ट की समीक्षा करेंगे।

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