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जम्मू-कश्मीर में आधिकारिक भाषाओं में पंजाबी को पुनर्स्थापित करें: बादल


चंडीगढ़ (गुरप्रीत): शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज जम्मू-कश्मीर के ले.गर्वनर से आग्रह किया है कि वे राज्य में राजभाषा के रूप में पंजाबी भाषा को अपनी उचित स्थिति के तौर पर पुनर्स्थापित करें।

आज दोपहर बाद ले. गर्वनर के नाम यहां जारी एक पत्र में सरदार बादल ने कहा कि पंजाबी न केवल राज्य के लोगों का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है बल्कि यह जम्मू-कश्मीर के संविधान में विधिवत प्रमाणित एक मान्यता प्राप्त भाषा थी।यह बताते हुए कि शिरोमणी अकाली दल करोड़ों पंजाबियों की मातृभाषा के लिए न्याय के लिए लड़ाई में हमेशा आगे रहा है तथा पार्टी भविष्य में भी ऐसा करने से संकोच नही करेगी।

शिरोमणी अकाली दल अध्यक्ष ने बताया कि पंजाबी भाषा सिख समुदाय के लिए गहरा धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक प्रभाव है। ‘ इस प्रकार जम्मू-कश्मीर में राजभाषा के रूप में पंजाबी के बहिष्कार को अल्पसंख्यक विरोधी के रूप में देखा जाना स्वाभाविक है और इसे जम्मू और कश्मीर प्रशासन के सिख विरोधी कदम के रूप में देखा जाना निश्चित है। सरदार बादल ने यह भी आगाह किया कि इस तरह के निर्णय उन लोगों को खतरनाक एजेंडा देगा जो जम्मू और कश्मीर के संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों में जो हमेशा देश में शांति और साम्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने के लिए ऐसे अवसरों की तलाश में रहते हैं।

अकाली नेता ने इस कदम को ‘भारत के संविधान की उस भावना का उल्लंघन बताया जो विविधता में एकता का प्रतीक है। उन्होने कहा कि यह कदम देश के सहकारी सांस्कृतिक और राजनीतिक संघवाद के विचार को गंभीर आघात देगा। उन्होने कहा कि भारतीय संघवाद के संस्थापकों को एक बहु धार्मिक, बहु सांस्कृतिक और बहुभाषी राष्ट्र के रूप में भारत के दृष्टिकोण से प्रेरित थे। ‘क्षेत्रीय भाषाओं के लिए एक समान और आदर्श को बढ़ावा देने के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में देखा गया है।

इस बात की ओर इशारा करते हुए सरदार बादल ने पंजाब और हरियाणा, हिमाचल प्रदेश , राजस्थान, दिल्ली और जम्मू और कश्मीर जैसे पंजाब और उसके पड़ोसी राज्यों में भाषा के विशेष दर्जे पर जोर देते हुए कहा कि पंजाबी भाषा संविधान में आधिकारिक तौर से पुनर्गठित भाषाओं के बीच प्रमुखता प्राप्त है और दुनिया भर में पंजाबी सभी पंजाबियों की मातृभाषा भी है।

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