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डॉ. मलिक ने अब मुख्यमंत्री को लिखा पत्र-खेल ग्रेडेशन नीति में संशोधन किए जाने की मांग


चंडीगढ़ (अदिति)- भारतीय हाकी संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जाट सभा चंडीगढ़ के प्रधान व हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक डा. एम.एस मलिक, आईपीएस (सेवानिवृत) ने हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल को राज्य की खेल ग्रेडेशन नीति में संशोधन किए जाने की मांग की है।

उन्होंने इस बारे में हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल को पत्र लिखा है। इससे पूर्व उन्होंने हरियाणा के खेल मंत्री  सरदार संदीप सिंह व हरियाणा के खेल विभाग के निदेशक को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार की खेल ग्रेडेशन नीति-2018 प्रदेश के खिलाडिय़ों के हितों व रोजगार उपलब्ध करवाने में लाभदायक नहीं है। इस नीति के अनुसार खेलों की ग्रेडेशन/पद क्रम लगभग 90 प्रतिशत कम हो जायेगा जिससे प्रदेश में खिलाडिय़ों रोजगार नहीं मिलेगा।

डा. मलिक ने आगे कहा कि सरकार की नई खेल नीति के अनुसार जिला, राज्य, राष्ट्रीय, अंर्तराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने वाले खिलाडिय़ों व यहां तक कि जिला स्तरीय खेलों में पदक विजेता खिलाडिय़ों को ग्रेडेशन का कोई फायदा नहीं मिलेगा और 30 नवंबर 1993 की खेल नीति की अपेक्षा नई खेल नीति में संपूर्ण ग्रेडेशन लगभग शून्य हो गया है। इसलिये खेलों के प्रोत्साहन व खिलाड़ी वर्ग के कल्याण हेतु सरकार की वर्ष 2018 की खेल नीति में आवश्यक संशोधन/सुझाव शामिल किये जाने अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने राज्य सरकार से यह भी मांग की कि खेल संघों, शिक्षा विभाग, खेल विभाग द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं के लिये सभी आयु वर्गों के जुनियर व सब-जुनियर खिलाडिय़ों को प्रतियोगिता अनुसार सीनियर के बराबर ग्रेड दिया जाये। वर्ष 2014 से लेकर अब तक के सभी अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेताओं को नौकरी दी जानी चाहिए। नौकरी के लिये सभी वर्गों में ग्रेड अनुसार क, ख, ग वर्ग में वरीयता अंक दिये जायें। सर्विस केवल वरिष्ठ स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में ही नहीं बल्कि नौकरी के लिये निर्धारित आयु पूरी होने पर सब जुनियर व जूनियर खिलाड़ी भी प्राप्त ग्रेड के अनुसार सर्विस के लिये पात्र होने चाहिए।

डॉ. मलिक ने कहा कि ग्रेड के लिये किसी खिलाड़ी के 50 प्रतिशत खेलने की शर्त, व्यक्तिगत व टीम गेम को अलग-अलग सुचियों में बांटना, खेलों में जातीय आधार पर आरक्षण देना आदि दोषपूर्ण नियमों को बदला जाना चाहिए। केंद्रीय सरकार की तर्ज पर अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाडिय़ों को तुरंत नकद इनाम देने का प्रावधान किया जाये। खिलाडिय़ों को सर्विस पदक उपलब्धि के आधार पर दी जानी चाहिए ना कि टैस्ट के आधार पर। शिक्षण व खेल प्रशिक्षण संस्थाओं में प्रवेश खिलाडिय़ों की वरीयता अंकों के आधार पर दिया जाना चाहिए। खेल कोटे से भर्ती खिलाडिय़ों के प्रमोशन का विशेष प्रावधान होना चाहिए। सभी शिक्षण संस्थाओं में आठवीं कक्षा से लेकर प्रवेश के लिये खिलाड़ी वर्ग के लिये 5 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित किया जाना चाहिए और सभी स्कूल व कालेजों में खेल आवश्यक किये जाने चाहिए। प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2019-20 में खेलों के लिये 406.17 करोड़ रूपये का बजट आबंटित किया गया था जोकि वर्ष 2020-20 से घटाकर 394.09 करोड़ कर दिया गया। अत: खेल व खिलाडिय़ों केे प्रोत्साहन हेतु स्वास्थ्य विभाग के बजट की तर्ज पर खेलों के लिये बजट भी हर वर्ष बढ़ाकर निर्धारित किया जाना चाहिए।

डॉ. मलिक ने हरियाणा प्रदेश के खिलाडिय़ों की उपलब्धि बारे कहा कि हरियाणा के मेहनतकश खिलाड़ी हर वर्ष राष्ट्रीय व अंर्तराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतिस्र्पधाओं में पदक जीत कर राष्ट्र के नाम को रोशन करते हैं इसलिये प्रदेश सरकार को प्रांत के खिलाडिय़ों की समस्याओं का तुरंत समाधान करते हुए खेलों के विस्तार के लिये खेलों को केंद्र की कनंकरैट सूची में शामिल करने के लिये केंद्रीय सरकार से आग्रह करना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेेल व खिलाडिय़ों के प्रोत्साहन व कल्याण हेतु सरकार द्वारा स्थाई तौर से कारगर नीति बनाई जानी चाहिए। जाट सभा द्वारा उपरोक्त सुझावों/संशोधनों को प्रदेश सरकार की नई खेल ग्रेडेशन नीति में शामिल करने हेतु हरियाणा के मुख्यमंत्री, खेल राज्य मंत्री, निदेशक खेल व यूथ अफेयर हरियाणा व अतिरिक्त मुख्य सचिव खेल व यूथ अफेयर हरियाणा को पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है ताकि खेल व खिलाडिय़ों को कल्याण हेतु लाभकारी व प्रभावशाली नीति सुनिश्चित की जा सके।

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