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दवा और उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच मांग पर सरकार ने समय माँगा


हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग में दवा और उपकरणों की खरीद में करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से कराने की एक मांग पर हरियाणा सरकार ने इस मामले में जवाब दायर करने के लिए कुछ समय देने की मांग की। सरकार की आग्रह पर हाई कोर्ट ने सरकार को 21 सितम्बर तक जवाब दायर करने का आदेश दिया है।

इस मामले में हाई कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय व हरियाणा विजिलेंस ब्यूरो को नोटिस जारी कर चुका है। कोर्ट ने यह आदेश जगविंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए हैं

याचिका के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में हुए दवा खरीद घोटाले के मामले में वर्ष 2018 में तत्कालीन सांसद और अब उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने सीबीआइ जांच और कैग से ऑडिट कराने की मांग की थी। आरटीआइ के अनुसार तीन वर्ष की अवधि में राज्य के सरकारी अस्पतालों में कई करोड़ रुपये की दवाएं और मेडिकल उपकरण बेहद महंगे दामों में खरीदे गए थे। याचिकाकर्ता ने कहा है कि अब दुष्यंत चौटाला प्रदेश के उप मुख्यमंत्री बनने के बाद मामले को भूल गए हैं और कार्रवाई की कोई मांग नहीं कर रहे। दुष्यंत ने जब यह मामला उठाया था, तब भी और अब भी स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ही हैं।

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया है कि हिसार की एक दवा कंपनी, जिस एड्रेस पर दर्ज है, वहां फर्म की जगह एक धोबी बैठा है। हिसार और फतेहाबाद के सामान्य अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की सप्लाई करने वाली फर्म का मालिक नकली सिक्के बनाने के आरोप में तिहाड़ जेल में था। उसने न केवल जेल से ही टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के कर्मी ने उसके झूठे हस्ताक्षर किए।

याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया है कि दवा और उपकरण सप्लाई करने वाली बहुत सी कंपनियों के पास लाइसेंस ही नहीं था। जिलों के सिविल सर्जनों ने न केवल दवाइंयां और उपकरण महंगे दामों में खरीदे, बल्कि ऐसी कंपनियों से दवाओं की खरीद कर ली, जो कागजों में करियाने और घी का कारोबार करती हैं। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच ईडी से कराने की मांग की है।

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