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प्राचीन धरोहरों को पर्यटन की दृष्टि से विश्व के मानचित्र पर लाने की पहल करेगा हरियाणा


चंडीगढ़, (अदिति)- हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की प्राचीन धरोहरों को पर्यटन की दृष्टि से विश्व के मानचित्र पर लाने की पहल करें । इसमें महाभारत काल से जुड़े धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र, सिख साम्राज्य की पहली राजधानी लौहगढ़ या मोहनजोदड़ो व हड़प्पा से भी पहले की सभ्यता से जुड़ी धरोहरों को शामिल किये जाने की आवश्यकता है ।

मुख्यमंत्री आज पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग द्वारा भारतीय डाक विभाग के सहयोग से प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के प्रसिद्ध पुरातात्विक स्थल हरियाणा के राखीगढ़ी पर बनाए गए विशेष आवरण को जारी करने के अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर पर पुरातत्व एवं संग्रहालय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अनूप धानक भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर धनतेरस व दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पौराणिक कथाओं व संस्कृति और इतिहास का अपना एक महत्व होता है। कोई भी देश व प्रदेश तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक वहां की युवा पीढ़ी को अपने इतिहास व संस्कृति की जानकारी नहीं होती। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 100 से अधिक ऐसे स्थल हैं, जिनका ऐतिहासिक व पौराणिक दृष्टि से महत्व है और ऐसे स्थलों का संरक्षण करने की दिशा में कार्य करना चाहिए ताकि भावी पीढ़ी को प्राचीन संस्कृति के महत्व और प्रेरित किया जा सके। इसके साथ ही ऐसे स्थलों को सहेज कर रखने और इन्हें विकसित करने से पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि सिख साम्राज्य के प्रथम सेनापति बाबा बंदा सिंह बहादुर ने मुगलों के अत्याचारों के विरुद्ध जो लड़ाई लड़ी थी, उसकी शुरुआत हरियाणा से ही हुई थी और उनकी राजधानी लौहगढ़, यमुनानगर को भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की पहल की गई है। वहां पर एक संग्रहालय व मार्शल आर्ट स्कूल की स्थापना की जा रही है। इसके अलावा, सरस्वती नदी के उद्गम स्थल आदिबद्री को भी भव्य रूप दिया जा रहा है।

पुरातत्व एवं संग्राहलय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनूप धानक ने विशेष कवर जारी करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विशेष कवर जारी करने से हरियाणा राज्य में पुरास्थल के महत्व को चिहिन्त करने के लिए एक यादगार स्मारिक बनेगी। हरियाणा की अमूल्य धरोहर के रूप में यह स्थल पीढ़ियों की विरासत है।

मुख्य सचिव विजय वर्धन ने कहा कि राखीगढ़ी का संबंध हड़प्पा और मोहनजोदड़ो सभ्यता से भी पुरानी सभ्यता से है, इसलिए इसका एक अलग महत्व है। इसकी खुदाई के दौरान जो अति प्राचीन वस्तुएं व अमूल्य कलाकृतियां मिली थी, उनसे पता चलता है कि आज का हरियाणा क्षेत्र उस समय बहुत उन्नत रहा होगा। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी में संग्राहलय व व्याख्यान केंद्र स्थापित किया जा रहा है । उन्होंने मुख्यमंत्री का विशेष आभार व्यक्त किया जिनकी पहल पर सरस्वती हैरिटेज बोर्ड का गठन किया गया है, जो प्राचीन सभ्यता को विश्व के मानचित्र पर लाने की दिशा में काम कर रहा है। पुरातत्व एवं संग्राहलय विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अशोक खेमका ने भी राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल पर विशेष आवरण जारी करने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।


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