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बादल अपनी डूबती बेड़ी बचाने के लिए घटिया स्तर की राजनीति पर उतरा


चंडीगढ़, (गुरप्रीत) : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज नये कृषि बिलों का निरंतर और बेशर्मी भरे ढंग से सियासीकरन किये जाने पर अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल पर बरसते हुये कहा कि वास्तव में बेसहारा किसानों पर यह कानून थोपने के लिए प्राथमिक तौर पर अकाली दल ही जि़म्मेदार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी नौटंकियां और राजनैतिक ओछापन शिरोमणि अकाली दल के पंजाब में गिर चुके गौरव को बहाल करने में सहायक नहीं होंगी क्योंकि पंजाब निवासियों ख़ास कर किसानों ने बादलों को दोगलेपन वाली नीति अपनाने के कारणरद्द कर चुके हैं।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बादलों की घटिया स्तर की राजनीति पर हैरानी ज़ाहिर की जिन्होंने अपने संकुचित राजनैतिक लाभ के लिए उस पार्टी का बेड़ा डुबा कर रख दिया जिसको पंजाबियों के हितों की रक्षा की विरासत और लंबे इतिहास करके जाना जाता था। उन्होंने कहा कि सुखबीर बादल और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत बादल में राजनैतिक सूझबूझ की कमी ने सदा के लिए अकाली दल की बेड़ी में पत्थर डाल दिए।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के चापलूस बन कर कृषि बिलों के प्रशंसा भरे श्ब्द गाने के लिए किसानों से माफी माँगने की बजाय सिद्धांतों से भटका बादल दम्पत्ति एन.डी.ए. का हिस्सेदार होने के नाते किसान भाईचारे के हितों की रक्षा करने में अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए हकीकत से ध्यान हटाने के लिए हाथ-पैर मार रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के किसानों को उम्मीद है कि अकाली दल ने एन.डी.ए. के साथ नाता तोड़ लिया है जिस कारण बादल अब किसानों के हकों की ख़ातिर लड़ाई में राज्य सरकार का खुल कर सहयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि जब पंजाब के भविष्य पर खतरे के बादल मंडरा रहे हों तो उस समय पर इस नाजुक समय पर राज्य को अपनाई हुई पार्टी को अपनी संकुचित राजनीति को एक तरफ़ करके एकजुट होकर लडऩे के लिए राज्य सरकार के साथ ठहरना चाहिए।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि ऐसा करने की बजाय अकाली दल ने उनकी सरकार पर हल्ला बोलने का रास्ता पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट है कि अकाली दल राज्य में अपनी छिनी हुई राजनैतिक ज़मीन ढूँढने के भद्दे यत्न कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सबसे पहले हरसिमरत बादल की तरफ से असंवैधानिक बिल पर संसद में वोटिंग से बिल्कुल पहले इस्तीफ़ा देना, एन.डी.ए. में से अकाली दल के बाहर आने का नाटक रचना और उसके बाद पंजाब के किसानों के बंद को हाइजैक करने की कोशिश करना बादलों की नौटंकी थी जिन्होंने इनका जनतक तमाशा बना दिया।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि यदि अकाली दल कृषि आर्डीनैंसों के मौके पर मूक दर्शक बन कर न रहता तो स्थिति यहाँ तक न पहुँचती। उन्होंने अकाली दल के प्रधान को कहा कि आपकों याद है कि कृषि प्रांतीय विषय है जिस संबंधी अब आप कोलाहल कर रहे हो।


मुख्यमंत्री ने सुखबीर बादल की तरफ से पंजाब विधान सभा का विशेष सत्र बुलाने की माँग और उनकी पार्टी की तरफ से ए.पी.एम.सी. एक्ट रद्द करने के लिए राज्य सरकार को बिना शर्त हिमायत देने की पेशकश किये जाने की भी खिल्ली उड़ायी है। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुखबीर को पूछा कि कृषि बिलों के लिए बुलाऐ सत्र के मौके पर प्रस्ताव पास करते समय आपके विधायक कहाँ थे। सर्वपार्टी मीटिंग के मौके आप बिना शर्त हिमायत क्यों नहीं दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपके दोगलेपन का मज़ाक सिफऱ् पंजाब में ही नहीं बल्कि मुल्क में उड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अकाली दल को ऐसी पाखंड के साथ लोगों का भरोसा जीतने में कोई फ़ायदा नहीं मिलना।

मुख्यमंत्री ने अकाली दल के प्रधान की तरफ केंद्रीय कानूनों को बाइपास करके आर्डीनैंस लाने की माँग पर सवाल उठाए जबकि उनकी सरकार पहले ही यह ऐलान कर चुकी है कि उनकी सरकार प्रांतीय कानून में संशोधन करने समेत सभी विकल्पों विचार रही है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सुखबीर चाहता है कि उनकी सरकार बिना कोई कानूनी सलाह लिए नया कानून या संशोधन कर दे जिसके बाद में अदालत में इसको सफलता न मिले। उन्होंने कहा कि इस समय पर बादलों का एकमात्र एजेंडा पंजाब को पेश मसलों की बजाय किसी न किसी ढंग से राज्य सरकार को कमज़ोर करना है।

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