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बादल ने कहा मुख्यमंत्री किसानों को गुमराह न करें


कहा कि यदि वह किसानों की वास्तव में चिंतित है तो डीजल पर राज्य के 2.70रूपए का राज्य वैट वापिस लिया जाना चाहिए

कहा कि सोनिया गाधी को महामारी के दौरान तेल कीमतें बढ़ने की चिता है पर इस मामले में उन्होने अपने पंजाब के मुख्यमंत्री से कुछ क्यों नही कहा

कहा कि फसलों का न्यूनतम समर्थन मुल्य सुनिश्चित मंडीकरण जारी रहेगा तथा अकाली दल इन दोनो मुद्दों से सरकार को भटकने की आज्ञा नही देगा


चंडीगढ़(अदिति) शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने आज मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से कहा है कि वे खेती उपज व्यापार तथा वाणिज्य अध्यादेश 2020 के विरोध में खड़े होकर पंजाबियों को गुमराह न करें, जब उनकी सरकार ने 2017 में संशोधन करके राज्य कृषि उत्पादन बाजार अधिनियम एपीएमसी में इनके प्रावधानों को शामिल किया था।

यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से पंजाबियों को यह बताने के लिए कहा कि उनकी सरकार ने 2017 में पूरे राज्य के लिए निजी बाजारों, सीधा मंडीकरण तथा इलेक्ट्रॉनिक कृषि मंडीकरण तथा एकल एकीकृत लाइसेंस के निर्माण की अनुमति देने के लिए एपीएमसी अधिनियम में संशोधन क्यों किया। उन्होने कहा कि सिर्फ इतना ही नही,कांग्रेस सरकार ही वो पार्टी है जिसने कृषि उपज व्यापार तथा वाणिज्य अध्यादेश 2020 को पास किया था। कांग्रेस पार्टी ने न इसे सिर्फ लागू किया था बल्कि केंद्र को फीडबैक भी दिया था कि उन्होने प्रस्तावित अध्यादेश को लागू करने के लिए राज्य एपीएमसी अधिनियम में पहले ही संशोधन कर दिया था।

सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि वह किस तर्क के आधार पर अध्यादेश को वापिस लेने की मांग कर रहे थे, जब उन्होने एपीएमसी अधिनियम में संशोधन करके इसे वास्तविक रूप दिया था तथा 14 अगस्त 2017 को इसे नोटिफाई किया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह हमेशा की तरह पंजाब के किसानों को धोखा देने का प्रयास कर रहे हैं। अध्यादेश को वापिस लेने की मांग करने वाला उनका ब्यान राज्य के किसानों की भलाई से संबधित संवेदनशील मुद्दे पर भावनाओं को भड़काने तथा राजनीति करने के अलावा अन्य कुछ नही है।

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास करने की बजाय पेट्रोल तथा डीजल के वैट में की गई भारी वृद्धि को वापिस लेना चाहिए, अगर वह वास्तव में किसानों तथा आम आदमी की भलाई के लिए चिंतित है। उन्होने कहा कि 6 मई को पेट्रोल तथा डीजल दोनो में 2रूपए की वृद्धि की गई, लेकिन सरकार ने 15 जून को पेट्रोल में 1.20रूपए प्रति लीटर तथा डीजल में 0.53पैसे की वृद्धि हुई थी। इससे पंजाब में ईंधन की कीमतें देश में सबसे ज्यादा हो गई है। दोनो बढ़ोतरियों को तत्काल वापिस लिया जाना चाहिए।

सरदार बादल ने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस तथा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी दोहरे मापदंड अपना रही है। उन्होने कहा कि जहां कांग्रेस अध्यक्ष ने ईंधन की कीमतों में वृद्धि का विरोध करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, वही ऐसा लग रहा है कि वह पंजाब के मुख्यमंत्री को यह बताना भूल गई हैं कि वे लोगों की परेशानियों से लाभ न कमाएं तथा जब किसान धान की फसल की बिजाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं

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