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बाबा बंदा सिंह बहादुर ने देश के लिए शक्ति भाव व सैनिक भाव के जज्बे की शुरुआत की


चंडीगढ़ (अदिति)- हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि श्री बाबा बंदा सिंह बहादुर ने देश के लिए शक्ति भाव व सैनिक भाव के जज्बे की शुरुआत श्री गुरु गोविंद सिंह के मार्गदर्शन में उस वक्त की थी जब मुगलों के अत्याचार से निराशा, अंधकार और भय का वातावरण था। आज , जब पड़ोसी देश भारत को बुरी नजर से देख रहे हैं, इसलिए युवा पीढ़ी को बाबा बंदा सिंह बहादुर के जीवन से प्रेरणा लेकर देशभक्ति की भावना के साथ आगे आना होगा। मुख्यमंत्री आज यहां वैबिनार के माध्यम से बाबा बंदा सिंह बहादुर के 350वें जन्म दिवस पर आयोजित समापन समारोह के अवसर पर अपना संदेश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहाहुर का जन्म भले ही जम्मू-कश्मीर के उस समय के पुंछ जिले के एक राजपूत परिवार में हुआ था और उनका नाम लक्ष्मण देव था, परंतु उन्होंने माधो दास बैरागी के नाम से महाराष्ट्र के नांदेड़ में अपने बैराग्य जीवन में तपस्या की थी। उस समय देश में भक्ति भाव का दौर था, परंतु मुगलों के अत्यचार के विरूद्ध सैनिक भाव से लडऩे में नेतृत्व की कमी थी। उस समय गुरु गोविंद सिंह ने माधो दास बैरागी को उत्तर भारत में मुगलों के खिलाफ लडऩे का आदेश दिया था और उनसे प्रेरणा लेकर बाबा बंदा सिंह बहादुर ने छोटी सेना बनाई और सरहंद को अपनी आर्थिक राजधानी बनाया जो हरियाणा के हांसी, हिसार, कैथल, टोहाना तक फैली हुई थी। इस प्रकार उन्होंने 1710 में पहले सिख राज्य की स्थापना की थी। बाद में लौहगढ़ को अपनी राजधानी बनाया जो हरियाणा के यमुनानगर जिले में हिमाचल प्रदेश की सीमा के साथ लगता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर मानवता के सबसे बड़े हितैषी थे। उनकी सेना में हिन्दु, मुस्लिम, सिख इत्यादि सभी धर्मों के सैनिक शामिल थे और वे हर किसी को सिंह कह कर पुकारते थे। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर ने देशभक्ति की मजबूत नींव रखी और एक साहसिक सेनापति होने का परिचय दिया। उन्होंने अपने राज्य में श्री गुरु नानक देव व श्री गुरु गोविंद सिंह के नाम से सिक्के व मोहर चलाई थी न कि अपने नाम से । जबकि उस समय व्यक्तिगत राज्य चलाने की परम्परा थी। इसके अलावा, उन्होंने जमीनदारों को जमीनों का मालिकाना हक दिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर की सेना में जिन 700 से अधिक सैनिकों ने शहादत दी थी, कहीं न कहीं उनके वंशज भी उसमें शामिल थे। उन्होंने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर की लौहगढ़ की राजधानी का पता लगाने के लिए उन्होंने वर्ष 2016 में निर्देश दिए थे तो उत्तर भारत में चार जगहों का नाम लौहगढ़ था, पर उनकी असली राजधानी लौहगढ़ यमुनानगर जिले वाली ही पाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा बंदा सिंह बहादुर के शौर्य को देखते हुए उनकी याद में लौहगढ़ में एक मार्शल आर्ट स्कूल खोलने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा लौहगढ़ में एक ट्रस्ट बनाया गया है जो इसके प्राचीन महत्व को एक संग्रहालय के रूप में विकसित करेगा। हरियाणा सरकार लौहगढ़ को एक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित कर रही है।


वैबिनार को पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के पूर्व कुलपति एवं इतिहासकार डा0 जसपाल सिंह, बाबा जतिन्द्र पाल सिंह सोढी, हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष सरदार गुरविंद्र सिंह, बाबा बंदा सिंह बहादुर सिख सम्प्रदाय के राष्ट्रीय संयोजक श्री शिव शंकर पाहवा ने भी सम्बोधित किया।

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