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मंदिरों की आय सरकारी खजाने में जाने की बजाए संचालकों के पास ही रहनी चाहिए : जगद्गुरु शंकराचार्य


चण्डीगढ़ : देश में हिन्दू गौरव के नाम पर सरकार तो चल रही है, परन्तु कहीं न कहीं आम हिन्दुजन सरकार से निराश हैं। ये कहना है ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती 1008 जी का, जो दो दिन के प्रवास पर चण्डीगढ़ पधारे हैं और आज भगवान परशुराम भवन, सेक्टर 37 में धर्मसभा को सम्बोधित करने से पूर्व प्रेस वार्ता में पत्रकारों से मुखातिब हुए। उनके मुताबिक भारत को हिन्दू राष्ट्र घोषित करना, मंदिरों की आय पर मंदिर संचालकों का हक़ देना एवं गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने जैसे अनेक मुद्दे हैं, जिन्हें लेकर हिन्दू समाज बेहद उद्वेलित है।

उन्होंने कहा कि भारत को अविलम्ब हिन्दू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए एवं गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आने वाली 20 नवम्बर को गोपाष्टमी के अवसर पर दिल्ली के रामलीला मैदान में गाय को राष्ट्र माता घोषित करने हेतु कि जा रही विशाल रैली को उनका भी पुरजोर समर्थन रहेगा।

दूसरे धर्म स्थलों के चढ़ावे की आय तो उनके संचालकों के पास ही रहती है परन्तु हिन्दू धर्म स्थलों की आय सरकारी खजाने में जाने के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वैसे तो ये आय मंदिरों के संचालकों के पास ही रहनी चाहिए, परन्तु इसके पीछे मंदिर संचालकों की भी कुछ कमी है, क्योंकि इन कमेटियों के पदाधिकारियों में आपस में मनभेद होते हैं, जिस कारण तीसरे पक्ष यानि सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ता है।

शंकराचार्य जी आज सेक्टर 37 स्थित भगवान परशुराम भवन में एक धर्म सभा को सम्बोधित करने पधारे जहां उनका स्वागत श्री देवालय परिषद के अध्यक्ष डॉ. पं. लाल बहादुर दुबे के साथ-साथ वरिष्ठ पदाधिकारीगण पं. उमाशंकर पांडे, पं. मोहनलाल शास्त्री, पं. ओम प्रकाश शास्त्री व पं. देवी प्रसाद पैन्यूली तथा श्री ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष यश तिवारी तथा धर्माचार्य गिरवर शर्मा आदि ने किया।

कल 8 नवम्बर को विशाल सनातन धर्म महोत्सव में सनातन धर्म की महानता एवं विशेषताओं के बारे में व्याख्यान देंगे शंकराचार्य जी

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