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राज्यपाल श्री दत्तात्रेय ने तेलंगाना भवन में बोनालु उत्सव में की शिरकत


चंडीगढ़: हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने आज नई दिल्ली स्थित तेलंगाना भवन में बोनालु उत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की, जिसमें उन्होंने महाकाली देवी की पूजा करते हुए मन्नत मांगी कि तेलंगाना का चहुंमुखी विकास हो, वहां अच्छी बारिश हो जिससे वहां फसल की पैदावार अच्छी हो और किसानों में खुशहाली आए तथा लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहे। यह कार्यक्रम सिक्का वाहिनी श्री महाकाली देवालयम लाल दरवाजा, हैदराबाद द्वारा आयोजित किया गया था।

नई दिल्ली के तेलंगाना भवन में आयोजित बोनालु उत्सव में राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने जहां एक ओर तेलंगाना में खुशहाली की कामना देवी महाकाली से की वहीं दूसरी ओर उन्होंने पूरी श्रृद्घा के साथ इस उत्सव में भाग लेकर तेलंगाना वासियों की अच्छी सेहत के साथ-साथ अच्छी फसल व हर घर में सुख शांति बनाए रखने के लिए पूजा और प्रार्थना भी की।

गौरतलब है कि बोनालु उत्सव तेलंगाना के खास उत्सवों में से एक है, जो हर साल आषाढ़ महीने में मनाया जाता है। इसमें देवी महाकाली की पूजा की जाती है। पूजा के द्वारा लोग भगवान को अपनी सारी मन्नतें पूरी होने के लिए आभार प्रकट करते हैं। इसके अलावा अगस्त माह में ज्यादा बीमारियां फैलती है तो लोग उससे बचने के लिए भी यह पूजा करते है। बोनम शद्ब्रद का अर्थ भोजनम् से है जिसका मतलब खाना या प्रसाद होता है। नए बर्तन में चावल, दूध और गुड़ को मिलाकर प्रसाद बनाया जाता है और बर्तन को नीम की पत्तियों और हल्दी से सजाया जाता है। प्रसाद के साथ सिंदूर, चूड़ी और साड़ी रखकर इस बर्तन को औरतें सिर पर रखकर मंदिर तक ले जाती है और देवी महाकाली को चढ़ाती है। आज के उत्सव में भी महिलाओं ने नए बर्तन में प्रसाद रखकर उसे नीम की पत्तियों और हल्दी से सजाकर अपने सिर पर रखकर देवी महाकाली को अर्पित किया। इस दौरान राज्यपाल श्री दत्तात्रेय ने भी प्रसाद वाले बर्तन को अपने सिर पर रखा और देवी मां को अर्पित किया।

कहा जाता है कि सन् 1813 में ट्विन सिटीज के नाम से मशहूर हैदराबाद और सिकंदराबाद में हैजा बीमारी फैलने से हजारों लोगों की जाने गई थी। इसके लिए हैदराबाद की आर्मी ने मध्यप्रदेश के उज्जैन के महाकाली मंदिर में प्रार्थना करके मन्नत मांगी थी कि बीमारी का संक्रमण पूरी तरह से खत्म हो गया तो वे अपने शहर में देवी महाकाली की मूर्ति की स्थापना करेंगे। इसके बाद हैजा का संक्रमण धीरे-धीरे क्चात्म होने लगा और वापस लौटकर आर्मी के जवानों ने अपने शहर में देवी मां की प्रतिमा लगवाई तथा इसके बाद ही हर साल बोनालु उत्सव मनाया जाने लगा। इसके अलावा एक और किवदंती इस उत्सव के बारे में यह है कि अगस्त महीने में मां महाकाली अपने मायके आती है, इसलिए ये उत्सव मनाया जाता है। उत्सव के दौरान शोभायात्रा निकाली जाती है।

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