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राष्ट्रीय खनिज सूचकांक से खनन सेक्टर को प्रतिस्पर्धी बनने में मिलेगी मदद


चंडीगढ, (अदिति) : भारत सरकार ने कोयला एवं खनन सेक्टर में कुछ सुधार किए हैं। राष्ट्रीय कोयला सूचकांक की ही तर्ज पर राष्ट्रीय खनिज सूचकांक (एनएमआई) तैयार करना इस सेक्टर के लिए सर्वाधिक ऐतिहासिक फैसला साबित हो सकता है।

कोयला सेक्टर को वाणिज्यिक खनन के लिए खोलने, राष्ट्रीय कोयला सूचकांक (नेशनल कोल इंडेक्स) लागू करने और वाणिज्यिक कोयला ब्लॉक की नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने जैसे फैसले खनन सेक्टर में आमूलचूल बदलाव ला सकते हैं। इससे देश में उत्पादन बढ़ाते हुए कोयला आयात के मद में सालाना करीब 80,000 करोड़ रुपये की बचत करने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त, नीलामी से राजस्व जुटाने की एक उचित व्यवस्था तैयारी होगी और अलग-अलग प्रकार से आजीविका के भी कई अवसर बनेंगे।

खनन सेक्टर को घोषित हो चुके सुधारों का समय से क्रियान्वयन होने से लाभ हो सकता है। इन सुधारों में एक्सप्लोरेशन के साथ-साथ खनन एवं उत्पादन के लिए एक ही चरण में नीलामी की व्यवस्था बनाना भी है, जिससे दुनियाभर की सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी वाली कंपनियां नीलामी में हिस्सा लेने और भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगी, क्योंकि उनके लिए यह सुनिश्चित होगा कि एक बार किसी ब्लॉक में कोयले की खोज के बाद उन्हें उत्पादन का अधिकार भी मिल जाएगा।

भारत एल्युमीनियम की जरूरत का 60 प्रतिशत आयात से पूरा करता है, जबकि घरेलू उत्पादन की क्षमता 41 लाख टन है, जो यहां की सालाना 40 लाख टन की मांग से ज्यादा है। घरेलू एल्युमीनियम मैन्यूफैक्चरर्स के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ाकर घरेलू उत्पादन क्षमता का पूरा लाभ लिया जा सकता है।

प्रतिस्पर्धी घरेलू एल्युमीनियम सेक्टर सालाना देश से बाहर जाने वाले करीब 40,000 करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में सहायक होगा। इसके अतिरिक्त, यह देश में उभरते एल्युमीनियम सेक्टर में 1.8 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश को भी आकर्षित करेगा, क्योंकि अगले पांच साल में इस सेक्टर में मांग दोगुनी होकर 80 लाख से 1 करोड़ टन होने का अनुमान है।

अर्थव्यवस्था के पुन: सुधार में खनन सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका होने जा रही है। बाजार के बदलते परिदृश्य और परिचालन व्यवस्थाओं के लिए मौजूदा परिस्थिति से पार पाने और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए खनन सेक्टर में तेज सुधारों की जरूरत है।

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