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लीबिया की जेल से 17 भारतीय लड़के हुए रिहा


चण्डीगढ़ : पिछले 6 महीने से लीबिया में फंसे 17 भारतीय लड़के कल त्रिपोली की जेल से रिहा हो गए। सांसद श्री. विक्रमजीत सिंह साहनी, जो कई महीनों से इस युवाओं की रिहाई एवं वतन वापसी के लिए प्रयास कर रहे हैं, ने बताया कि पंजाब और दिल्ली के कुछ बेईमान ट्रैवल एजेंटों ने इन युवाओं को, जिनमें से ज्यादातर युवा पंजाब और हरियाणा के हैं इन्हे इटली भेजकर वहां आकर्षक नौकरी का वादा करते हुए लगभग 11 लाख रुपये वसूल कर लिए (राशि अलग-अलग लोगों के हिसाब से अलग-अलग होती है)। ये सभी युवा फरवरी, 2023 में भारत से दुबई और फिर मिस्र होते हुए इटली के लिए रवाना हुए और कुछ दिनों के बाद उन्हें लीबिया में उतार दिया गया और ज़ुवारा शहर में स्थानीय माफिया के सुपरत कर दिया, जहां उन्हें भोजन और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा था और शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा था।


श्री साहनी ने कहा कि जब उन्हें इस साल मई में इसके बारे में पता चला, तो उन्होंने ट्यूनीशिया में भारतीय दूतावास से संपर्क किया और इन सभी लड़कों को बचाने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की। “मेरा कार्यालय इन लड़कों और उनके परिवारों के साथ लगातार संपर्क में था। शुरुआत में हमारी प्रमुख चिंता उन्हें स्थानीय माफिया की कैद से बाहर निकालना था।'' श्री साहनी ने कहा.


श्री साहनी ने स्थानीय माफिया द्वारा बचाए गए इन लड़कों के माफिया से भागने की नाटकीय घटना का विवरण करते हुए बताया की , 13 जून, 2023 को लीबियाई पुलिस अधिकारियों की मदद से हमने इन लड़कों को निर्माणाधीन इमारत से भगाया, जहां इन युवाओं को सशस्त्र समूह/माफिया ने बंदी बना कर रखा था। इसके बाद उन्हें लीबिया के ज़वारा शहर में एक होटल में ठहराया, जिसके लिए सभी धनराशि हमारे द्वारा प्रदान की गई थी। मेरा कार्यालय पूरी रात इन लड़कों के साथ कॉल पर था जब तक कि यह बचाव अभियान अलसुबह समाप्त नहीं हो गया।


श्री साहनी ने कहा कि हालांकि, अनिश्चितताओं को देखते हुए और उनके फिर से सशस्त्र समूह के हाथों में पड़ने जाने की आशंका में, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और 15 जून, 2023 को ज़वारा के एक जेल में डाल दिया और हमने उनकी रिहाई और भारत वापसी के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की ।


श्री साहनी ने कहा कि कल उनकी रिहाई की प्रक्रिया पूरी हो गई और लीबियाई अधिकारियों ने इन युवाओं को जेल से रिहा कर दिया और अभी उन्हें उनके यात्रा दस्तावेजों की व्यवस्था होने तक त्रिपोली में अवैध आप्रवासियों के बंदरगाह के शिविर कार्यालय में रखा गया है । उनकी सुचारू, सुरक्षित और भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए आपातकालीन प्रमाणपत्र भारतीय दूतावास द्वारा बनाया जा है।


श्री साहनी ने कहा कि वह अपने घर वापस आने वाले इन युवाओं के सभी कानूनी खर्चों और उड़ान टिकटों को प्रायोजित करेंगे और उसके बाद हम उन्हें अपने कौशल केंद्रों में मुफ्त में कौशल विकास की शिक्षा प्रदान करेंगे ताकि उन्हें यहीं भारत में नौकरी के अवसर प्रदान हो सकें और नौकरी की तलाश में विदेश न जाना पड़े और इस तरह फंसना ना पड़े।

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