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शिक्षा महाकुंभ RASE-23


चण्डीगढ़: ‘शिक्षा का महाकुंभ RASE-23 बहुत ही आवश्यक व सामयिक विषय है द्य इसमें संपन्न होने वाली चर्चाओं और गंभीर विचार मंथन में से निकलने वाले निर्णयों द्वारा शिक्षा क्षेत्र को एक नई दिशा मिलेगी, ऐसा मेरा विश्वास है द्य परिवर्तन तो प्रकृति का नियम हैद्य शिक्षा व्यवस्था में भी समय के साथ परिवर्तन होते रहे हैं और आज वह परिवर्तन का समय आ चुका है द्य सभी स्तरों पर चर्चा, देश भर के विद्वानों से प्राप्त सुझावों के बाद सामने आई है ‘नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ द्य इसमें तीन बिदुओं पर विशेष बल दिया गया है - तकनीक, इन्नोवेशन और रिसर्च द्य भारत के प्राचीन ज्ञान को नवीन ढंग से प्रस्तुत करके देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए, यह शिक्षा नीति बनाई गई है द्य जिसे भारत के यशस्वी एवंम ओजस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2030 तक पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य रखा है द्य जबकि हरियाणा के मुख्य मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर इसे 2025 तक ही लागू करने के लिए दृढता से प्रयासरत है। यह प्रेरणात्मक उद्गार हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय ने आज डॉ. भीमराव अंबेडकर छप्ज् जलंधर में अयोजित शिक्षा महाकुंभ RASE-23’ के दूसरे दिन कार्यक्रम में सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए द्य यह पावन अवसर था 9 से 11 जून तक चलने वाले ‘शिक्षा के महाकुंभ RASE-23 के दूसरे दिन के भव्य उद्घाटन का द्य अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए राज्यपाल ने कहा कि कोई भी सरकार या कोई भी संस्था पूरे देश को रोजगार नहीं दे सकती द्य बेरोजगारी की समस्या का समाधान स्वयं हमारे पास है और वह है युवाओं में कौशल विकास द्य हम नौकरी करने वाले नहीं बल्कि नौकरी देने वाले बनें ।

श्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि देश के भावी निर्माताओं का उद्देश्य केवल मात्र सरकारी नौकरियों के पीछे भागना नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें कौशल विकास कार्यक्रम का लाभ उठाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए न केवल अपने लिए रोजगार अर्जित करना चाहिये बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाला बनना चाहियें। उन्होंने कहा है कि आज के समय में माता-पिता को अपने घरों में बच्चों को भरपूर समय देना चाहिए तथा उनकी दिल की बात को सुन कर और समझकर उन्हें अपनी खानदानी परमपराओं, रीति-रिवाजों, संस्कारों के साथ-साथ उन्हें देश की महान सभ्यता व संस्कृति से प्रेरित करना चाहियें। श्री बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि शिक्षण संस्थान शिक्षा का मन्दिर होते है। इसलिए शिक्षा व्यापार के लिए नहीं बल्कि ज्ञान प्रदान कराने का एक पवित्र स्थान है। जो पैसे के लिए कमाता है वह नीचे गिर जाता है, जो नाम के लिए कमाता है वह उन्नति के शिखर पर पहुँच जाता है। उन्होंने स्वयं अपने संघर्षमय समर्पित जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया की वे शिक्षक के रूप में गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करते थें और आज वही इंसान हरियाणा के राज्यपाल है। इस उद्घाटन से पूर्व श्री बंडारू दत्तात्रेय ने मंच पर उपस्थित अन्य अधिकारियों के साथ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर RASE-23 के दूसरे दिन का उद्घाटन किया द्य इसके पश्चात सर्वहितकारी विद्या मंदिर, जलंधर के छात्रध् छात्राओं ने मधुर स्वर में मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की द्य मंच का सार्थक और ओजस्वी संचालन प्रकाशवती सर्वहितकारी विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य डा.अखिलेश्वर सिंह अरोड़ा ने किया द्य उद्बोधन कार्यक्रम के पूर्व मंच पर उपस्थित हरियाणा के राज्यपाल श्री बंडारू दत्तात्रेय का शॉल उढाकर तथा श्रीफल, पावन पवित्र स्वर्ण मन्दिर की प्रतिमा भेट कर भव्य अभिनन्दन एवं स्वागत किया। इसके इलावा अन्य गणमान्यों स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठन मंत्री व सह संगठन मंत्री क्रमशः कश्मीरी लाल व सतीश कुमार, छप्ज् के निदेशक विनोद कनौजिया, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष रघुनंदन, विद्या भारती के अध्यक्ष टी. रामकृष्ण राव, दैनिक जागरण के मुख्य संपादक अमित शर्मा, भारतीय शिक्षण मंडल पंजाब के संगठन मंत्री नितेश कुमार को शाल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया । स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय सह संगठन मंत्री सतीश कुमार ने वार्ता शैली में अपनी बात विद्वतजनों के सामने रखते हुए कहा कि किसी भी देश की शक्ति उस देश के नौजवानों में निहित होती है द्य आज हमारा देश पूरे विश्व में ‘नौजवानों के देश’ के रूप में जाना जाता है द्य लेकिन देश की यह युवा शक्ति आधुनिक तकनीकों में पारंगत और अपने देश की परंपराओं व महापुरुषों पर गर्व करने वाली हो । इससे पूर्व विद्या भारतीय अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष टी. रामकृष्ण राव ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 बहुत अच्छी और देश को उज्जवल भविष्य की ओर ले जाने वाली है। हम सभी का परम कर्तव्य है कि इसे लागू करने के लिए कमर कस कर तैयार हो जाएं द्य स्वतंत्रता के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में भी स्वतंत्र व स्व विचार आने चाहिए थे लेकिन दुर्भाग्य है कि ऐसा संभव न हो सका द्य इसी कमी को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 1952 में एक छोटा सा दीप विद्या मंदिर के रूप में शुरू किया गया जो अब वट वृक्ष का रूप धारण कर चुका है द्य इस वट वृक्ष का नाम है ‘विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान’ द्य यह संगठन इस नीति को क्रियान्वित करने में दिन रात लगा हुआ है द्य इस अवसर पर उपरोक्त महानुभावों के अतिरिक्त ठाकुर विजय, सुभाष महाजन, नीलम शर्मा, मनदीप तिवारी, अमित कांसल, चंद्रहास गुप्ता, अरविंद बैंस, रंजना मित्तल, सरहिंद से महेश शर्मा, चंडीगढ़ से अर्चना नागरथ, कमल संधू, जितेंद्र शर्मा, अनिल शास्त्री, फतेहगढ़ चूड़ियाँ से सरदार सुरेंद्र सिंह, तरनतारन से सीमा रानी, अमृतसर से रीना ठाकुर, कुरुक्षेत्र से सुरेंद्र अत्री, तलवाड़ा से देशराज शर्मा आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे द्य अंत में भारतीय शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री नितेश कुमार ने सभी का धन्यवाद किया ।

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