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संगीतमय 'भारत आराधना' कार्यक्रम ने देश प्रेम का जोश भरा


पंचकूला: संस्कार भारती, पंचकूला एवं हरियाणा कला परिषद, अंबाला मंडल द्वारा स्वाधीनता के अमृत काल में वीर योद्धाओं की गाथाओं को याद करते हुए वीरगति प्राप्त वीर योद्धाओं के परिवारों को पी डब्लू डी सेक्टर 1, पंचकूला के सभागार में सम्मानित किया गया।


कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित हुए उत्तरी कमान के पूर्व आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) बी एस जसवाल ने दीप प्रज्वलित कर की। इस दौरान उनके साथ आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक प्रेमजी गोयल, विशिष्ट अतिथि हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता तथा जिला सैनिक बोर्ड, पंचकूला के सेक्रेटरी कर्नल नरेश, संस्कार भारती के उत्तर क्षेत्र प्रमुख नवीन शर्मा, संस्कार भारती, पंचकूला के अध्यक्ष सुरेश गोयल व महासचिव सतीश अवस्थी व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।


इस अवसर पर वीर योद्धाओं की गाथाओं को याद करते हुए वीरगति प्राप्त वीर योद्धाओं के परिवारों को मुख्य अतिथि द्वारा हुतातमा मेजर नवनीत वत्स, हुतात्मा मेजर अनुज राजपूत, हुतात्मा मेजर संदीप शांकला, हुतात्मा मेजर अनुज सूद के परिवार को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया, तथा उनकी वीरता को याद किया गया। ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व उद्घोषक सर्वप्रिय निर्मोही की मधुर आवाज में कार्यक्रम का संचालन किया गया। इस अवसर पर वीरगति प्राप्त बलिदानियों को याद करते हुए 2 मिनट का मौन भी धारण किया गया।


अपने सम्भाषण में उत्तरी कमान के पूर्व आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) बी एस जसवाल ने कहा कि संस्कार एक दार्शनिक शब्द है। ये सिखाए नहीं जाते बल्कि व्यवहार से समझे और जाने जाते हैं। संस्कार भारती व्यक्तित्व को निखारने का कार्य कर रही है। हमारे मूल्य और संस्कार पढ़ाई में शामिल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बलिदानियों के परिवारों का सम्मान करना, देश पर गर्व करना, अपने इतिहास पर गर्व करना यही संस्कार और मूल्य हैं। एक फौजी बलिदान के हमेशा तैयार रहता है। यह उसका प्रण होता है। यह संस्कार हमें संतों ने सिखाया है। उन्होंने संत दधीचि का उदाहरण दिया जिन्होंने असुरों के नाश के लिए अपनी हड्डियां अर्पित की थीं। हमारे परमवीर चक्र में उनकी हड्डियों का निशान होता है।


प्रेमजी गोयल ने कहा कि संघ के कार्यकर्ता देश के लिए समर्पित रहते हैं। वे सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते रहे हैं। 1962 में जब युद्ध हुआ तो संघ के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की सम्पूर्ण ट्रैफिक व्यवस्था संभाली थी। 1971 में जब युद्ध का समय था तो संघ के स्वयंसेवकों को कार्य दिया गया कि सैनिकों के लिए भोजन की व्यवस्था करें और सरहद तक पहुंचाएं। सभी कार्यकर्ताओं ने यह दायित्व बखूबी निभाया।


ज्ञानचंद गुप्ता, विधानसभा अध्यक्ष,हरियाणा सरकार ने कहा कि हमें अपने वीरों पर गर्व है कि उन्होंने देशहित में सर्वोच्च बलिदान दिया और उनके परिवार को सम्मानित करते हुए उनके इस अतुलनीय योगदान को हमेशा स्मरण करेंगे।


कार्यक्रम स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में अखण्ड भारत से विश्व गुरु भारत को लक्षित करते हुए आयोजित किया गया था। इस अवसर पर देशभक्ति के गीतों का ’भारत आराधना’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। डॉ० अरुण कान्त के निर्देशन में ए आर मेलोडीज ग्रुप के प्रसिद्ध संगीतकार, गायकों द्वारा देशभक्ति समूह गान, प्रथम बार ‘संघ गीतों’ का संगीतबद्ध समूह गान प्रस्तुत किया गया जिनमें ले चले हम राष्ट्र नौका को भंवर से पार कर, हम करें राष्ट्र आराधना, चले चले हम निशदिन अविरल सतत चले, हिन्दू जगे तो विश्व जगेगा, विश्व मंगल साधना के हम हैं मौन पुजारी, हिन्दू भूमि की हम संतान, निर्मल पावन भावना सभी के सुख की कामना, सागर वसना पावन पावन देवी सलिल सुहावन भारत मां, साधना के देश में मत नाम ले विश्राम का, वन्देमातरम! गानों के नाम शामिल हैं। कलाकारों ने दो गीतों पर कत्थक नृत्य के कलाकारों ने अपनी नृत्य प्रस्तुति दी।


दर्शकों ने सम्पूर्ण कार्यक्रम का जमकर लुत्फ उठाया, वे साथ-साथ गा रहे थे, झूम रहे थे और बार-बार सभागार देशभक्ति के जयकारों से गूंज रहा था।


इस अवसर पर संस्कार भारती, पंचकूला के सभी सदस्य गण भी मौजूद रहे।

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