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ढ़ींडसा शिरोमणी अकाली दल का नाम उपयोग करके गैरकानूनी काम कर रहे हैं:डॉ. दलजीत सिंह चीमा


कहा कि ढ़ींडसा कांग्रेस पार्टी के कहने पर काम कर रहा है

ढ़ींढ़सा ने दिग्गज नेता और अकाली दल (टकसाली)अध्यक्ष रंजीत सिंह ब्रहमपुरा को भी गलत बताया

कहा कि दोनों ढ़ींढ़सा गुट और आप दोनों ही कांग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया एजेंट बन गए हैं

चंडीगढ़(गुरप्रीत) : शिरोमणी अकाली दल ने आज कहा कि सरदार सुखदेव सिंह ढ़ींडसा ने कांग्रेस पार्टी के इशारे पर शिरोमणी अकाली दल के नाम का गैरकानूनी उपयोग करके बड़ी साजिश रची है जोकि कभी सफल नही होगी।

यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि कोइ भी मोहल्ला स्तर पर मीटिंग आयोजित नही कर सकता और 100 साल पुरानी पार्टी को बदलने का फिजुल दावा नही कर सकता, यह पार्टी के संविधान के अनुसार संभव नही है। सरदार ढ़ींढ़सा अपने तरीके से लोकतंत्र की व्यवस्था करना चाहते हैं। जैसे कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनका अधिकार है। हमारी एकमात्र आपत्ति अकाली दल के नाम पर उनके द्वार की जा रही धोखाधड़ी के बारे है। ढ़ींढ़सा अकाली दल का हिस्सा रहे हैं। वह जानते हैं कि पार्टी का संविधान है और पार्टी का ढ़ांचा और प्रतिनिधि पदाधिकारियों के साथ पार्टी अध्यक्ष का चुनाव करते हैं। यह उस जैसे कद वाले व्यक्ति को ऐसी बातें करना शोभा नही देता।

डॉ. चीमा ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरदार ढ़ींढसा ने आज कांग्रेस पार्टी के कहने पर कुछ लोगों को इकट्ठा किया। सरदार बलवंत सिंह रामूवालिया और मंजीत सिंह जीके जैसे कुछ अन्य ने भी समारोह में भाग लिया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि उनकी अपनी राजनीतिक जत्थेबंदी में शामिल होने के लिए अपनी राजनीतिक पार्टी को भंग नही कर रहे।

अकाली नेता ने कहा कि सरदार ढ़ींढ़सा ने अकाली दल (टकसाली) अध्यक्ष रंजीत सिंह ब्रहमपुरा के साथ भी गलत किया था। उन्होने कहा कि सरदार ढ़ींढ़सा ने दिग्गज नेता के अस्पताल से बाहर आने का भी इंतजार तक नही किया और यहां तक कि अगर वह किसी राजनीतिक दल के अध्यक्ष बनना चाहते थे तो अकाली दल (टकसाली) के अध्यक्ष बनने से क्यों इंकार कर दिया था। यहां देखने वाली बात यह है कि सरदार ढ़ींढ़सा ने इस प्रस्ताव से इंकार कर दिया जिससे यह स्पष्ट है कि वह अकाली दल के खिलाफ कोइ लड़ाई नही लड़ रहा है बल्कि वह अकाली दल का अध्यक्ष बनना चाहता था। उन्होने कहा कि यह केवल अति महत्वाकांक्षी का स्पष्ट मामला है क्योंकि सरदार ढ़ींढ़सा ने सरदार ब्रहमपुरा के अध्यक्ष पद बनने के  समक्ष  झूकने से इंकार कर दिया था।

अकाली नेता ने कहा वास्तविक तथ्य सामने आ रहे हैं। उन्होने कहा कि जाहिर तौर पर कांग्रेस पार्टी ही थी जिसने सरदार ढ़ींढ़सा का मार्गदर्शन किया और उन्हे सलाह दी थी कि वह अकाली दल(टकसाली) से न भिड़े ऐसा करने से हिंदू समुदाय से भी दूर हो जाएंगे। हम टकसाली नेताओं का सम्मान करते हैं और  उन्होने अकाली दल को बहुत बड़ा योगदान दिया है सरदार ढ़ींढ़सा को कांग्रेस पार्टी के कहने पर टकसाली नाम इस्तेमाल नही करना चाहिए।

डॉ. चीमा ने यह भी साफ किया कि ढ़ींढ़सा गुट और आम आदमी पार्टी दोनो ही कांग्रेस के सोशल मीडिया के एजेंट बन गए हैं। ये दोनो पार्टियां कांग्रेस के इशारेे पर भंगवा के खिलाफ महागठबंधन बनाने का काम कर रही हैं। उन्होने कहा कि जनता इस साजिश को देखेगी तथा दोनो का अस्वीकार कर देगी।

अकाली नेता ने कहा कि जहां तक शिरोमणी अकाली  दल का सवाल है तो यह 100 साल पुरानी पार्टी है जो बड़ी बड़ी कुर्बानियां देने के बाद अस्तित्व में आई थी। उन्होेने कहा कि पार्टी का गौरवशाली इतिहास रहा है और इसने पंजाबियत की अवधारणा के अलावा वर्तमान पंजाब के गठन में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।अकाली दल लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास करता है। कई लोगों ने इससे टूटकर अपनी जत्थेबंदी बना ली हैं, यह उनका अधिकार है। डॉ. चीमा ने कहा कि कोई भी पार्टी उस पार्टी के नामकरण का दावा नही  कर सकती , जिससे उन्हे निष्कासित कर दिया गया हो।

प्रेस कांफं्रेस में मौजूद अन्य लोगों के अलावा यूथ अकाली दल (वाईएडी) के अध्यक्ष सरदार परमबंस सिंह रोमाणा और पार्टी कार्यालय सचिव सरदार चरनजीत सिंह बराड़ उपस्थित थे।

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