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1 अक्तूबर से घर -घर जाकर आटा सप्लाई की शुरुआत करने के लिए हरी झंडी



तीन पड़ावों में लागू होगी सेवा और समूचे राज्य को आठ जोनों में बांटा

गेहूं की पिसाई की सारा खर्चा राज्य सरकार वहन करेगी जिससे लाभार्थियों के 170 करोड़ रुपए बचेंगे

चंडीगढ़ (गुरप्रीत) पंजाब के लोगों को उनके द्वार पर जाकर सुचारू ढंग से राशन मुहैया करवाने की वचनबद्धता को पूरा करते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने पहली अक्तूबर से घर-घर जाकर आटो की सप्लाई करने की सेवा की शुरुआत करने की मंजूरी दे दी है और इस सेवा को राज्य भर में तीन पड़ावों में लागू किया जायेगा। राष्ट्रीय ख़ाद्य सुरक्षा एक्ट के अंतर्गत आटे की घर-घर सप्लाई की शुरुआत करने के लिए ख़ाद्य, सिविल सप्लाईज़ और उपभोक्ता मामलों संबंधी विभाग के सहमति देते हुए समूचे राज्य को आठ जोनों में बांटा गया है और पहले पड़ाव में एक जोन में यह सेवा शुरू की जायेगी और दूसरे पड़ाव में दो जोनों में और तीसरे पड़ाव में बाकी पाँच जोनों में शुरू की जायेगी। मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता के मुताबिक राज्य सरकार एन.एफ.एस.ए. के अंतर्गत दर्ज किये हर लाभार्थी को एन.एफ.एस.ए. के अधीन आटे की होम डिलीवरी की पेशकश करेगी। कोई भी लाभार्थी, जो कि एक फेयर प्राइस शॉप (वाजिब कीमत दुकान, एफ.पी.एस.) से अपने हिस्से की गेहूँ यदि ख़ुद जाकर इकट्ठा करना चाहता है, तो उसके पास मुफ़्त में उपलब्ध एक उचित आई.टी. दख़ल द्वारा इससे बाहर रहने का विकल्प मौजूद होगा। यह राशन अब तिमाही चक्कर से महीनावार के चक्कर में बदला जायेगा। घर-घर आटा पहुँचाने की सेवा मोबाइल फेयर प्राइस शापज़ (एम.पी.एस.) की धारणा को पेश करेगी। एम.पी.एस. एक ट्रांसपोर्ट वाहन होगा, प्राथमिक तौर पर लाभार्थी को आटा सौंपने को लाइव करने के लिए जी.पी.एस. सुविधा और कैमरे से लैस किया जायेगा। इसमें लाज़िमी तौर पर तोलने की सुविधा होगी जिससे ग्राहक को आटे की डिलीवरी करने से पहले इसके वज़न संबंधी संतुष्ट किया जा सके। बायोमीट्रिक तस्दीक, लाभार्थी को प्रिंट की वज़न स्लिप सौंपना आदि की सभी लाज़िमी ज़रूरतें एम.पी.एस. द्वारा प्रदान की जाएंगी। सभी एम.पी.एस. लायसेंस, ख़ाद्य और सिविल सप्लाई विभाग द्वारा जारी किये जाएंगे। एक एम.पी.एस. को एन.एफ.एस.ए. के अधीन ‘वाजिब कीमत की दुकान’ जैसी स्थिति का दर्जा मिलेगा। सिर्फ़ एम.पी.एस. ही आटे की होम डिलीवरी की सुविधा प्रदान करेंगे। एफ.पी.एस. लाभार्थी को गेहूँ की सुपुर्दगी की मौजूदा सुविधा की पेशकश करना जारी रखेगा और लाभार्थी को एफ.पी.एस. पर जाना होगा और गेहूँ की अधिकारित मात्रा को शारीरिक तौर पर इकट्ठा करना होगा। किसी भी ऐम.पी.ऐस. और ऐफ.पी.ऐस. के बीच अदला-बदली की इजाज़त जारी रहेगी। जहाँ भी लाभार्थी ने आटे की होम डिलीवरी की सुविधा का चयन किया है, यह अपने आप यह भी संकेत करेगा कि लाभार्थी ने ऐम.पी.ऐस. को पसन्दीदा वाजिब कीमत की दुकान के तौर पर चुना है और फिर ऐम.पी.ऐस. को ऐसे लाभार्थी के दरवाज़े तक आटे की निर्धारित मात्रा पहुँचाने की ज़िम्मेदारी सौंपी जायेगी।

जहाँ भी किसी लाभार्थी को आटा दिया जा रहा है, उस लाभार्थी से 2रुपए प्रति किलो की मौजूदा राशि की वसूली ऐम.पी.ऐस. द्वारा इकट्ठी की जायेगी। इस मंतव्य के लिए ऐम.पी.ऐस. प्राथमिक तौर पर डिजिटल विधि के साथ भुगतान की रकम इकट्ठी करेगा। सिर्फ़ जहाँ लाभार्थी से डिजिटल भुगतान करने पहुँच नहीं होती, वहीं ऐम.पी.ऐस. भुगतान को नकदी रूप में इकट्ठा करेगा।

ऐन.ऐफ.ऐस.ए. के लाभार्थियों को आटे की होम डिलीवरी की सेवा की सफलतापूर्वक पेशकश करने के लिए ज़रूरी सभी गतिविधियों को पूरा करने के लिए मार्कफैड्ड द्वारा स्पैशल पर्पज़ व्हीकल (ऐस.पी.वी) का गठन किया जायेगा।

मंत्रीमंडल ने यह भी फ़ैसला किया कि गेहूँ पीस कर आटा बनाने का सारा खर्चा राज्य सरकार वहन करेगी चाहे कि ऐन.ऐफ.ऐस.ए. के दिशा -निर्देश गेहूँ की पिसाई का खर्चा लाभार्थी से वसूलने की इजाज़त देते हैं। इस नयी सेवा से लाभर्थियों के लिए 170 करोड़ रुपए की बचत होगी जो अब इन लाभार्थियों की तरफ से स्थानीय आटा चक्कियाँ से गेहूँ की पिसाई पर खर्चा जाता है।

श्री मुक्तसर साहिब में नरमे की फ़सल का 50 प्रतिशत नुक्सान मानते हुये 5400 रुपए प्रति एकड़ राहत देने की मंजूरी

राज्य के बजट में से किसानों को वित्तीय राहत देने के लिए मंत्रीमंडल ने श्री मुक्तसर साहिब में समूचे क्षेत्र में नरमे का 50 प्रतिशत नुक्सान मानते हुए प्रति एकड़ 5400 रुपए की वित्तीय राहत देने का ऐलान किया है। इस फ़ैसले से प्रभावित किसानों और नरमा चुगने वाले कामगारों को राज्य के बजट में से क्रमवार 38.08 करोड़ रुपए और 3.81 करोड़ रुपए जारी किये जाएंगे। ज़िक्रयोग्य है कि ज़िला श्री मुक्तसर साहिब में गुलाबी सूंडी के हमले के कारण नरमे की फ़सल को हुए नुक्सान के एवज़ में प्रभावित किसानों को 4.74 करोड़ रुपए और नरमा चुगने वाले कामगारों को 47.44 लाख रुपए की राहत दी गई थी।

श्रमिक कल्याण बोर्ड की साल 2015-16 और 2016-17 की सालाना और लेखा रिपोर्टों को मंजूरी

मंत्रीमंडल ने पंजाब निर्माण और अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की साल 2015-16 और 2016-17 के लिए सालाना और लेखा रिपोर्टों को मंजूरी देते हुए इनको कानून के अंतर्गत पंजाब विधान सभा में पेश करने की इजाज़त दे दी है।

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