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13 नवंबर - शुक्रवार- धनतेरस का महत्व , खरीदी व पूजन के मुहूर्त


मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिषाचार्य ,चंडीगढ़, 98156-19620    जैसे नवरात्रि पर नौ दिन, दुर्गा माता के नौ स्वरुपों की आराधना की जाती है, ठीक उसी भांति दीवाली के अवसर पर पंचोत्सव मनाने की परंपरा है। किस दिन क्या पर्व होगा और उस दिन क्या छोटे छोटे कार्य व उपाय करने चाहिए, उसका दैनिक विवरण संक्षिप्त रुप में हम दे रहे हैं। विभिन्न पर्वों की तिथियां 13 नवंबर - शुक्रवार- धन त्रयोदशी- धनवंतरी जयंती, हनुमान जयंती 14 नवंबर - शनिवार - चर्तुदशी, नरक चौदश , दीवाली   14 नवंबर - शनिवार -, दीवाली   15 नवंबर - रविवार,, गोवर्धन पूजा , अन्नकूट , विश्वकर्मा दिवस 16 नवंबर -सोमवार,- यम द्वितीया- भाई दूज ..................................................................................................................................... 13 नवंबर - शुक्रवार को धनतेरस पर क्या करें ? यह पर्व दीवाली के आगमन की सूचना देता है

13 नवंबर शक्रवार धनतेरस होने से स्वास्थ्य के देवता भगवान धनवंतरी की पूजा भी करने का विधान है। धनतेरस पर आरोग्य के देवता धन्वंतरी की पूजा-अर्चना की जाए और दैनिक जीवन में संयम-नियम आदि का पालन किया जाए। देवी लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थीं, उसी प्रकार भगवान धन्वंतरी भी अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं। देवी लक्ष्मी हालाकिं की धन की देवी हैं, परन्तु उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य और लम्बी आयु भी चाहिए। यही कारण है दीपावली के पहले, यानी धनतेरस से ही दीपामालाएं सजने लगती हैं।

भगवान धन्वंतरी का जन्म त्रयोदशी के दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वंतरी का जन्म हुआ था, इसलिए इस तिथि को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। धन्वंतरी जब प्रकट हुए थे, तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वंतरी चूंकि कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। कहीं-कहीं लोक मान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन खरीद्दारी करने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है।

भगवान कुबेर को सफेद मिठाई का भोग लगाना चाहिए, जबकि धन्वंतरि को पीली मिठाई और पीली चीज प्रिय है। पूजा में फूल, फल, चावल, रोली-चंदन, धूप-दीप का उपयोग करना चाहिए। शाम को परिवार के सभी सदस्य इकट्ठा होकर प्रार्थना करें। सबसे पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें स्नान कराने के बाद चंदन या कुमकुम का तिलक लगाएं। भगवान को लाल वस्त्र पहनाकर भगवान गणेश की मूर्ति पर ताजे फूल चढ़ाएं।

कुबेर की पूजा

कुबेर देव को धन का अधिपति कहा जाता है। माना जाता है कि पूरे विधि- विधान से जो भी कुबेर देव की पूजा करता है उसके घर में कभी धन संपत्ति की कभी कमी नहीं रहती है। कुबेर देव की पूजा सूर्य अस्त के बाद प्रदोष काल में करनी चाहिए।

लक्ष्मी की पूजा

सूर्य अस्त होने के बाद करीब दो से ढ़ाई घंटों का समय प्रदोष काल माना जाता है। धनतेरस के दिन लक्ष्मी की पूजा इसी समय में करनी चाहिए। अनुष्ठानों को शुरू करने से पहले नए कपड़े के टुकड़े के बीच में मुट्ठी भर अनाज रखा जाता है।

कपड़े को किसी चौकी या पाटे पर बिछाना चाहिए। आधा कलश पानी से भरें, जिसमें गंगाजल मिला लें। इसके साथ ही सुपारी, फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने और अनाज भी इस पर रखें। कुछ लोग कलश में आम के पत्ते भी रखते हैं। इसके साथ ही इस मंत्र का जाप करें-

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

इसके बाद एक प्लेट में लक्ष्मी जी की प्रतिमा का पंचामृत (दूध, दही, घी, मक्खन और शहद का मिश्रण) से स्नान कराएं। इसके बाद देवी चंदन लगाएं, इत्र, सिंदूर, हल्दी, गुलाल आदि अर्पित करें। परिवार के सदस्य अपने हाथ जोड़कर सफलता, समृद्धि, खुशी और कल्याण की कामना करें।

धनतेरस के मौके पर क्या खरीदें

1. लक्ष्मी जी व गणेश जी की चांदी की प्रतिमाओं को इस दिन घर लाना, घर- कार्यालय, व्यापारिक संस्थाओं में धन, सफलता व उन्नति को बढाता है।

2. धनतेरस के दिन चांदी खरीदने की भी प्रथा है। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि यह चन्द्रमा का प्रतीक है जो शीतलता प्रदान करता है और मन में संतोष रूपी धन का वास होता है। संतोष को सबसे बड़ा धन कहा गया है, जिसके पास संतोष है वह स्वस्थ है, सुखी है और वही सबसे धनवान है।

3. भगवान धन्वन्तरी जो चिकित्सा के देवता भी हैं, उनसे स्वास्थ्य और सेहत की कामना की जाती है। लोग इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हैं।

धनतेरस के दिन क्या करें

1. ऐसा माना जाता है कि इस दिन नए उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ रहता है। शुभ मुहूर्त समय में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है। सात धान्य गेहूं, उड़द, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर है। सात धान्यों के साथ ही पूजन सामग्री में विशेष रुप से स्वर्णपुष्पा के पुष्प से भगवती का पूजन करना लाभकारी रहता है। इस दिन पूजा में भोग लगाने के लिये नैवेद्य के रूप में श्वेत मिष्ठान्न का प्रयोग किया जाता है। साथ ही इस दिन स्थिर लक्ष्मी का पूजन करने का विशेष महत्व है।

2. धन त्रयोदशी के दिन देव धनवंतरी देव का जन्म हुआ था। धनवंतरी देव, देवताओं के चिकित्सकों के देव हैं। यही कारण है कि इस दिन चिकित्सा जगत में बड़ी-बड़ी योजनाएं प्रारम्भ की जाती हैं। धनतेरस के दिन चांदी खरीदना शुभ रहता है।

13 नवम्बर चौघडियानुसार खरीदी व पूजन के मुहूर्त

चंचल : सुबह 6:43 बजे से 8:05 बजे तक।

लाभ : सुबह 8:05 से 9:27 तक ।।

अमृत : सुबह 9:27 से 10:49 बजे तक।

शुभ : दोपहर 12:11 से 1:33 तक बजे तक।

चंचल : शाम 4:17 से 5:39 बजे बजे तक।

लाभ : रात 8:23 से 10:01 बजे तक।

आज 13 नवंबर सायं 5.30  बजे से 7.30  बजे तक खरीदारी कर सकतेे है ।  प्रदोष काल सायं 5.30 से 8 बजे तक रहेगा।  वैद्य एवं चिकित्सक धन्वंतरी की पूजा अर्चना कर सकते हैं। ऽ प्रातः प्रवेश स्थल व द्वार को धो दें और रंगोली बनाएं, वंदनवार , बिजली की झालर लगाएं। ऽ घर का सारा कूड़ा करकट ,अखबारों की रदद्ी,टूटा फूटा सामान,पुरानी बंद इलेक्ट्र्ानिक चीजें बेच दें।जाले साफ करें।नया रंग रोगन करवाएं।आफिस घर साफ करें। अपने शरीर की सफाई करें।तेल उबटन लगाएं।पार्लर जा सकते हैं। ऽ पुराने बर्तन बदल के नए लें।चांदी के बर्तन या सोने के जेवर खरीदें।नया वाहन या घर की कोई दीर्घ समय तक प्रयोग की जाने वाली नई चीज लें। खीलें बताशे आज ही खरीदें । धान से बनी सफेद खीलें सुख, समृद्धि व सम्पननता का प्रतीक हैं अतः इसे धनतेरस पर ही घर लाएं। ऽ इस दिन बाजार से नया बर्तन घर में खाली न लाएं उसमें , मिश्ठान या फल भर के लाएं ऽ धनतेरस की रात यदि आपको अपने घर में छिपकली दिख जाए तो समझें पूरा वर्श शुभ रहेगा। इस दिन संयोगवश इसके दर्शन दुर्लभ होते हैं। ऽ सायंकाल मुख्य द्वार पर आटे का चौमुखी दीपक बना कर , चावल या गेहूं की ढेरी पर रखें।साथ में जल, रोली ,गुड़ फूल नैवेद्य रखें । इसे आज  से 5 दिन हर शाम जलाएं। ऽ व्यवसायी अपने बही -खाते, विद्यार्थी पुस्तकों आदि की पूजा करें । ऽ आरोग्य हेतु आज धन्वंतरि दिवस पर जरुरत मंदों को दवाई दान दें । ऽ नई या पुरानी इलैक्ट्र्ानिक आयटम पर  नींबू घुमा के वीरान जगह फेंकें या निचोड़ के फलश में डाल दें। ऽ इस दिन नए कपडे़ेःपहनने से पूर्व उन पर  हल्दी या केसर के छींटे दें। ऽ नई कार या वाहन खरीदने पर उसके  बोनट  पर कुमकुम व घी के मिश्रण से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं ,नारियल पर रोली से ओम् बना के वाहन के आगे फोडं़े और प्रशाद बांट दें। ऽ पुराना फटा पर्स बदल दें,नया पर्स  या बैग खरीदें। इसमें क्रिस्टल,श्री यंत्र,गोमती चक्र,कौड़ी,हल्दी की गांठ,पिरामिड,लाल रंग का कपड़ा,लाल लिफाफे में अपनी इच्छा /विश लिख कर रखें।  लाल रेशमी धागे में गांठ लगा के पर्स में रख लें ।मनोकामना में विवाह की इच्छा या ऐसा ही कोई रुका कार्य या धन प्राप्ति आदि लिख सकते हैं। ऽ .मेष ,सिंह,बृश्चिक  व धनु राशि वाले लाल,पीला , नारंगी या भूरे रंग का पर्स या बैग रखें ।, बृष ,तुला, कर्क वाले सफेद, सिल्वर, गोल्डन , आसमानी । मकर व कुंभ राशि के लोग नीले ,काले  , ग्रे  कलर के , मिथुन तथा कन्या राशि के हरे रंग के पर्स या बैग   खरीदें । ऽ आज के दिन किसी को उधार न दें। किस राशि वालों को इस दिन क्या करना चाहिए 1.मेष: सोने का सिक्का ,विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण मोबाइल, टी.वी आदि खरीदें। लाल फल. का दान करें। 2.बृष: गोल्ड क्वाएन , साबुत हल्दी, शिक्षा संबंधी उपकरण जैसे लैपटाप या कंप्यूटर ले सकते हैं ।   3.मिथुनः फूड प्रोसेसर, मिक्सी ,केसर, कलई किए बर्तन आदि ले। 4.कर्कः चांदी के बर्तन, मोती का हार या अंगूठी,मकान वाहन का क्रय आज  अत्यंत शुभ रहेगा। फ्रिज , वाटर प्योरिफायर या वाटर कूलर खरीदें । 5.सिंहः सोने के आभूशण या गोल्ड क्वाएन खरीदना धन वृद्धि करेगा। शहद, खजूर उपहार दें । 6.कन्याः, नया मोबाइल, ब्रॉड बैंड कनेक्शन, टीवी तथा संचार संबंधी उपकरण ,स्टील केे बर्तन , होम अप्लायंस खरीदें। क्रेडिट कार्ड या ऋण लेकर कुछ न खरीदें । 7.तुलाः चांदी केे बर्तन, क्राकरी लें,  परफयूम, रियल एस्टेट में निवेश करें। हर तरफ से धन धान्य की प्राप्ति। 8.बृश्चिकः इलैक्ट््रानिक आयटम में खरीदें। लाल रंग का एप्लायंस अच्छा रहेगा। तांबे केे बर्तन, डेेकोेरेशन पीस खरीदे । 9.धनुः लक्ष्मी जी का सोने का सिक्का या मूर्ति सामर्थ्यानुसार खरीद कर पूजा स्थान पर स्कापित करें। 10.मकरः प्रापर्टी से कुछ प्राप्त होगा। यदि वाहन या गृहपयोगी बर्तन या बिजली के यंत्र खरीदना चाहें तो काले रंग के लें। 11. कुंभः लोहे की कढ़ाई, कुकर  वाहन , फ्रिज, टी.वी आदि काले ,नीले या ग्रे कलर का लें। 12.मीनः पूर्वनिर्मित मकान या  फलैट की प्राप्ति। प्रापर्टी का ब्याना देना । तांबे के बर्तन लें ।

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