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2010 से 2016 तक लगभग 140 तहसीलोें व सब-तहसीलों में जो भी रजिस्ट्रियां हुई हैं, उनकी जांच करवाई जाएगी



जमीनों की रजिस्ट्री में पारदर्शिता के लिए ई-पंजीकरण शुरू किया गया

प्रत्येक पात्र लाभार्थी को उसका हक अवश्य मिलेगा- मुख्यमंत्री

चंडीगढ़ (अदिति) - हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई निरंतर जारी रहेगी और जो भी भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति पर चलते हुए ही सीएम ने आज यह घोषणा की कि वर्ष 2010 से 2016 तक लगभग 140 तहसीलोें व सब-तहसीलों में जो भी रजिस्ट्रियां हुई हैं, उनकी जांच करवाई जाएगी। 6 महीने में इसकी एक ठोस रिपोर्ट तैयार करवाकर आगामी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने विधानसभा सत्र के उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि नगरीय क्षेत्र विकास एवं विनियमन, 1975 के तहत अधिसूचित क्षेत्र में 7-ए का उल्लंघन करके रजिस्ट्रियां करवाने की बात विपक्ष ने कभी भी सरकार को बताई नहीं, बल्कि सरकार ने स्वयं इस पर संज्ञान लिया है। इसी के परिणामस्वरूप 13 अगस्त 2020 को सभी मण्डलायुक्तों और उपायुक्तों को तहसीलों में वर्ष 2017 से वर्ष 2020 तक हुई रजिस्ट्रियों का डाटा सत्यापित कर उपलब्ध करवाने को कहा गया था।

उन्होंने कहा कि धारा 7- ए के तहत रजिस्ट्री के लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग और नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग से एनओसी लेना अनिवार्य था। परंतु वर्ष 1975 से 2017 तक कभी भी किसी सरकार ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया की रजिस्ट्री के लिए एनओसी प्राप्त किया गया है या नहीं।

उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि शहरों में अनाधिकृत कालोनियां न पनपें, इसके लिए नगरीय क्षेत्र विकास एवं विनियमन, 1975 की धारा 7-ए में समय-समय पर संशोधन पहले की सरकारोें में भी होते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में, हमारी सरकार ने अनाधिकृत कॉलोनियों को बढ़ावा ना मिले इसके लिए इस अधिनियम के तहत अधिसूचित खाली भूमि के दो हैक्टेयर अर्थात अढाई एकड़ के स्थान पर दो कनाल कृषि भूमि किया गया। उसके बाद 14 सितम्बर, 2020 को एक और संशोधन करते हुए इस दो कनाल कृषि भूमि को एक एकड़ खाली भूमि किया गया।

उन्होंने कहा कि समय-समय पर यह संशोधन जनता की मांग और प्राप्त शिकायतों के आधार पर होते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 13 जून 2020 को गुरुग्राम से रजिस्ट्री में गड़बड़ी की कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थी और सरकार ने स्वयं संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज करवाई और तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी इत्यादि को निलंबित किया गया।

इसके बाद 13 अगस्त 2020 को वित्त आयुक्त, मंडलायुक्त और उपायुक्तों को पत्र लिखे और संबंधित तहसीलों में रजिस्ट्री में 7- ए के उल्लंघन की जानकारी सरकार के साथ साझा करने के निर्देश दिए। परिणामस्वरूप सरकार के पास लगभग 68,000 रजिस्ट्रीयों का आंकड़ा सामने आया है। इन रजिस्ट्रीयों से संबंधित तहसीलदार, सब-तहसीलदार, पटवारी, क्लर्क इत्यादि से 15 दिनों के अंदर अंदर स्पष्टीकरण दाखिल करने को कहा गया।

उन्होंने बताया कि खाली कृषि भूमि को गैरमुमकिन भूमि के रूप में राजस्व रिकार्ड में गिरदावरी के समय तब्दील करने के आरोप में 381 पटवारियों के खिलाफ कार्यवाही की गई।

जमीन की रजिस्ट्री में पारदर्शिता के लिए ई-पंजीकरण शुरू किया गया

उन्होंने कहा कि पहले रजिस्ट्री का कार्य मैनुअल तरीके से किया जाता था, परंतु हमने सितंबर 2020 में इसका एक ऑनलाइन सिस्टम बनाया। सभी प्रणाली को सुव्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए एक -डेढ़ महीने तक प्रदेशभर में नई रजिस्ट्रीयां नहीं हुई थी।

उन्होंने कहा कि पंजीकरण के तहत अब जमीन की प्रवृत्ति को राजस्व रिकॉर्ड के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी रजिस्ट्री करते समय जमीन की प्रवृत्ति में बदलाव न कर पाए। यदि आवश्यक हुआ तो नियमों में संशोधन भी किए जाएंगे ताकि किसी भी स्तर पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की कोई संभावना न रहे।

1300 अनधिकृत कॉलोनियों ने नियमित करने के लिए किया आवेदन

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनधिकृत कॉलोनियों को बढ़ने से रोकना ही सरकार का मुख्य लक्ष्य है और यह सब प्रणालियां इसीलिए अपनानाई जा रही हैं । पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी और ग्रामीण) भी इन्हीं प्रणालियों का एक हिस्सा है जिसके तहत गरीबों को किफायती आवास प्रदान करना और अनधिकृत कॉलोनियों को बढ़ने से रोकना है।

उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में भी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया गया है। वर्तमान राज्य सरकार ने भी अपने कार्यकाल के दौरान 750 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया है और अब 1300 ऐसी कॉलोनियों ने सरकार को नियमित करने के लिए आवेदन भेजा है। सभी मानदंड पूरा करने के बाद इन कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी भी प्रकार के मामले में कोई भी कार्रवाई की है तो वह हमने की है

मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल जमीन की रजिस्ट्री में गड़बड़ी पकड़ने की बात नहीं है इससे पहले भी जब कभी भी सरकार के समक्ष किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी की जानकारी आई है हमने उस पर तुरंत सख्त कार्रवाई की है। इसके लिए सीएम फ्लाइंग स्क्वाड विजिलेंस ब्यूरो के साथ-साथ जिला विजिलेंस टीम को भी सक्रिय किया गया है ताकि जमीनी स्तर पर इस तरह के मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जा सके।

उन्होंने कहा कि विजिलेंस ब्यूरो द्वारा करनाल में डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर, तहसीलदार और 2 जेई का रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा जाना इस बात का सबूत है कि राज्य सरकार किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार सहन नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने यह कहा की सरकार ने जमीन की रजिस्ट्री में गड़बड़ी को मान लिया है, परंतु वास्तव में हमने यह गड़बड़ियां पकड़ी हैं न कि मानी है। यह जानकारी हमने अपने अपने स्तर पर जुटाई है, जमीन की रजिस्ट्रीयों में गड़बड़ी की शिकायत विपक्ष ने कभी भी सरकार को नहीं दी है।

पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल के संबंध में उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार किसी को बचाने का प्रयास कर रही है, बल्कि आज सदन में विपक्ष द्वारा जिन भी अधिकारियों के नाम लिए गए हैं उनके खिलाफ भी जांच करवाई जाएगी।

पत्रकार द्वारा पूछे गए एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन की रजिस्ट्री के समय एनओसी प्राप्त करने का नियम वर्ष 1975 से ही है। नियमित कॉलोनी के लिए दिवाली पर को एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेस का भुगतान करना पड़ता है, गणना के हिसाब से 1 स्क्वायर मीटर पर सभी बुनियादी सुविधाएं देने के लिए 2500 रुपये का खर्च आता है और डेवलपमेंट चार्जेस का भुगतान न करना पड़े इसीलिए अनधिकृत कॉलोनियों को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने कहा कि स्टांप ड्यूटी की चोरी नहीं हुई है और जमीनों का प्रकार बदल कर रजिस्ट्री हुई हैं व डेवलपमेंट चार्ज नहीं लिए गए हैं।

प्रत्येक पात्र लाभार्थी को उसका हक अवश्य मिलेगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का ध्येय प्रत्येक लाभार्थी को सभी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। पेंशन के संबंध पर पूछे गए एक सवाल के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि वृद्धावस्था पेंशन के लिए वर्ष 1991 से ही कुछ नियम और शर्तें तय हैं। वर्ष 2011 में, नियमानुसार पेंशन का लाभ लेने के लिए पति और पत्नी की आय 50,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए थी, परंतु 2012 में पिछली सरकार ने ही 50000 रुपये आय की सीमा को 2 लाख रुपये कर दिया था।

उन्होंने कहा कि परिवार पहचान पत्र के माध्यम से हमें 23000 ऐसे व्यक्तियों का आंकड़ा प्राप्त हुआ है जिनकी आयु 60 से 70 वर्ष है परंतु उन्होंने अभी तक पेंशन का लाभ नहीं लिया है। सरकार ऐसे सभी व्यक्तियों से संपर्क कर रही है और सर्वे के बाद उनकी पेंशन बनाई जाएगी।

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