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21 जून के इस दुर्लभ सूर्य ग्रहण से बढ़ेंगी आशंकाएं, रहना होगा हर तरफ से सचेत


चंडीगढ़ (गुरप्रीत) प्रसिद्ध ज्योतिर्विद्,मदन गुप्ता सपाटू का कहना है कि रविवार 21 जून को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण प्रातः 9 बजकर 15 मिनट पर लगेगा और दोपहर 3 बजकर 05 मिनट तक रहेगा।यह अपने चरम पर 12:18 बजे के करीब रहेगा .इसकी कुल समय.सीमा कुल 03 घंटे 33 मिनट रहने की संभावना है- यह वलयाकार सूर्य ग्रहण रहेगा।

क्यों पहले से भिन्न है यह ग्रहण ? मत्स्य पुराण के अनुसार , समुद्र मंथन के दौरान, निकले अमृत को राहू- केतु ने छीन लिया था, तब से ग्रहण की कथा, इतिहास चला आ रहा है। द्रौपदी के अपमान का दिन सूर्य ग्रहण का था। महाभारत का 14वां दिन, सूर्य ग्रहण का था और पूर्ण ग्रहण पर अंधेरा होने पर जयद्रथ का वध किया गया। जिस दिन श्री कृष्ण की द्वारिका डूबी वह भी , सूर्य ग्रहण का दिन था।

क्या 21 जून का सूर्य ग्रहण धरती को कंपाएगा, धमकाएगा, हिलाएगा,डराएगा या इससे भी कुछ अधिक कर सकता है ?

इस बार एक साथ छ ग्रह वक्री रहेंगे, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु यह छह ग्रह 21 जून 2020 को वक्री रहेंगे

इस दिन उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है। 25 साल पहले घटित 1995 के ग्रहण के चलते दिन में ही अंधेरा छा गया था, पक्षी घोंसलों में लौट आए थे, हवा ठंडी हो गई थी। ग्रहण के दिन अशुभ गण्डयोग, पूर्णकाल सर्पयोग, मिथुन राशि से अष्टम में नीच राशिगत गुरू, वक्री शनि, इस तरह षडाष्टक अशुभयोग भी बन रहा। भारत की कुण्डली में कालपुरूष का मुख स्थान यही है जहां मिथुन राशि पर ग्रहण होगा, विषाणु व विस्तार का कारक राहु यहीं पर संस्थित है, कृपया सतर्क सचेत रहिये। जिस तरह का यह ग्रहण है वैसा 900 साल बाद घटित होगा। कंकण आकृति ग्रहण होने के साथ ही यह ग्रहण रविवार को होने से और भी प्रभावी हो गया है। यह बहुत दुर्लभ है।

भारत का महा युद्ध

आज से 5000 साल पहले जब महाभारत के युद्ध का 14 वां दिन था, कुरुक्षेत्र के अलावा कई अन्य देशों में पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा था और दिन में ही अंधेरा छा गया था। इस दिन अर्जुन, अभिमन्यु के वध का बदला लेने की प्रतिज्ञा करते हैं। कोैरव जयद्रथ को छिपा देते हैं। पूर्ण ग्रहण के कारण अंधेरा छा जाता है। रात्रि के कारण युद्ध बंद हो जाता है जो वास्तव में रात नहीं थी । परंतु जैसे ही ग्रहण समाप्त होता है, उजाला होता है, श्री कृष्ण अर्जुन से जयद्रथ का वध करवा देते हैं।

वह भारत का महा युद्ध था, आज विश्व विश्व पटल पर ,विश्व युद्ध जैसा वातावरण चल रहा है।

भारत में यह ग्रहण आंशिक रूप से नयी दिल्ली, मुम्बई, हैदराबाद, कोलकाता, चंडीगढ़, बंगलौर, लखनऊ, चैन्नई जैसे कुछ प्रमुख शहरों में देखा जा सकता है. इसके अलावा यह नेपाल, यूऐई, पाकिस्तान, सऊदी अरब, एथोपिया और कोंगों जैसे देशों में भी दिखेगा।

ग्रहण होने के 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है. सूतक के समय को सामान्यता अशुभ माना जाता है. इस दौरान शुभ कार्य करना वर्जित होता है. सूर्य ग्रहण के 12 घंटे से पूर्व ही सूतक लगने के कारण मंदिरों के पट भी बंद कर दिए जाते है. ऐसे में पूजा, उपासना या देव दर्शन नहीं किए जाते हैं।

आज से 5000 साल पहले जब महाभारत के युद्ध का 14 वां दिन था, कुरुक्षेत्र के अलावा कई अन्य देशों में पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा था और दिन में ही अंधेरा छा गया था। इस दिन अर्जुन, अभिमन्यु के वध का बदला लेने की प्रतिज्ञा करते हैं। कोैरव जयद्रथ को छिपा देते हैं। पूर्ण ग्रहण के कारण अंधेरा छा जाता है। रात्रि के कारण युद्ध बंद हो जाता है जो वास्तव में रात नहीं थी । परंतु जैसे ही ग्रहण समाप्त होता है, उजाला होता है, श्री कृष्ण अर्जुन से जयद्रथ का वध करवा देते हैं।

वह भारत का महा युद्ध था, आज विश्व विश्व पटल पर ,विश्व युद्ध जैसा वातावरण चल रहा है। क्या 21 जून का सूर्य ग्रहण धरती को कंपाएगा, धमकाएगा, हिलाएगा,डराएगा या इससे भी कुछ अधिक कर सकता है ?

दिनांक 21 जून 2020 रविवार, आषाढ़ कृष्ण 30, मृगशिरा नक्षत्र, मिथुन राशि पर यह ग्रहण होगा। मृगशिरा के चतुर्थ चरण से आरम्भ हो आद्रा नक्षत्र जो कि राहु का नक्षत्र है समाप्त होगा। रविवार सूर्य का दिन। मृगशिरा नक्षत्र के स्वामी मंगल,आद्रा नक्षत्र पर राहु का आधिपत्य।और मिथुन राशि पर ग्रहण जिसका स्वामी बुध। इस तरह चार ग्रहों की युति मिथुन राशि पर सूर्य + चन्द्र + राहु + बुध, इन पर मंगल की दृष्टि, मंगल के नक्षत्र मृगशिरा से सूर्यग्रहण आरम्भ होगा। एक साथ बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु यह छह ग्रह 21 जून 2020 को वक्री रहेंगे। इन छह ग्रह का वक्री होना यानी एक बड़ा तहलका मचाने वाला है।ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुभ नहीं माना जा रहा है। यह ग्रहण अनिष्‍टकारी प्रतीत हो रहा है।

सूर्य ग्रहण का समय-- ग्रहण प्रारम्भ काल: 9:15

परमग्रास:12:10

ग्रहण समाप्ति काल:15:05

खण्डग्रास की अवधि: 03 घण्टे 28 मिनट्स 36 सेकण्ड्स

सूर्य ग्रहण का सूतक काल

सूतक प्रारम्भ: 21:52, जून 20

सूतक समाप्त: 15:05

इसे धार्मिक दृष्टि से महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है क्‍योंकि यह चंद्र ग्रहण के मात्र 16 दिन बाद लग रहा है . आगामी 5 जुलाई को एक बार फिर से चंद्र ग्रहण लगेगा।इसके बाद मौजूदा वर्ष के अंत में एक और सूर्य ग्रहण होगा। ग्रहण के दौरान सूर्य वलयाकार की स्थिति में केवल 30 सेकंड की अवधि तक ही रहेगा। इसके चलते सौर वैज्ञानिक इसे दुर्लभ बता रहे हैं। ग्रहण के दौरान सूर्य किसी छल्ले की भांति नजर आएगा। इस बार के सूर्यग्रहण में जो स्थिति बनने जा रही है, उसी ने इसे दुर्लभ ग्रहणों में शामिल किया है। सूर्य व चंद्रमा के बीच की दूरी ही इसकी खास वजह है। सूरज के लॉकडाउन में चले जाने के कारण दुनियाभर के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। इस दौरान सूरज के सतह पर सौर विकिरण में आश्चर्यजनक रूप से कमी आई है। वैज्ञानिकों ने इसे सोलर मिनिमम नाम दिया है। इसके प्रभाव से धरती पर भूकंप, ठंड और सूखे की आशंका बढ़ गई है। ग्रहण के दौरान सूर्य की पृथ्वी से 15 करोड़ 2 लाख 35 हज़ार 882 किमी की दूरी रह जाएगी। इस दौरान चांद भी 3 लाख 91 हज़ार 482किमी की दूरी से अपने पथ से गुजर रहा होगा। अगर चांद इस दौरान पृथ्‍वी के और पास होता तो यह ग्रहण एक पूर्ण सूर्यग्रहण बन जाता। इसी तरह अगर सूर्य थोड़ा और पास होता तो ग्रहण का नज़ारा बदल जाता। लेकिन अब यह ग्रहण वलयाकार होगा, यानी चांद पूरी तरह से सूर्य को नही ढंक पाएगा। करीब 30 सेकंड के लिए ही चांद सूर्य के बड़े भाग को कवर करेगा। अंत में सूर्य का आखिरी हिस्सा एक चमकती हुई रिंग के समान नजर आएगा। 30 सेकंड के बाद यह ग्रहण समाप्‍त हो जाएगा।

21 जून को सूर्य के वलय पर चंद्रमा का पूरा आकार नजर आएगा। सूर्य का केन्द्र का भाग पूरा काला नजर आएगा, जबकि किनारों पर चमक रहेगी। इस तरह के सूर्य ग्रहण को पूरे विश्व में कहीं-कहीं ही देखा जा सकता है और अधिकांश जगह लोगों को आंशिक ग्रहण ही नजर आता है। जब भी सूर्य ग्रहण होता है, दो चंद्र ग्रहण के साथ होता है। इसमें या तो दोनों चंद्रग्रहण उससे पहले होते हैं अथवा एक चंद्रग्रहण सूर्य ग्रहण से पहले एवं दूसरा सूर्यग्रहण के बाद दिखाई देता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।

ग्रहण शुभ फल लेकर नहीं आते हैं. ये भविष्य में आने वाली परेशानियों के बारे में भी इंगित करते हैं. देशकाल की बात करें तो एक माह में दो ग्रहण प्राकृतिक आपदाओं का भी कारण बनते हैं. इसके अतिरिक्त सीमा विवाद, तनाव जैसी स्थिति की तरफ भी इशारा करते हैं. दो ग्रहण कई क्षेत्रों में हानि का सूचक भी होता है।

ग्रहण और सूतक का समय

सूतक 20 जून को रात 10:20 से ही शुरू हो जाएगा। सूतक काल में बालक, वृद्ध एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन नहीं करना चाहिए। इस दौरान खाद्य पदार्थो में तुलसी दल या कुशा रखनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं को खासतौर से सावधानी रखनी चाहिए। ग्रहण काल में सोना और भोजन नहीं करना चाहिए। चाकू, छुरी से सब्जी,फल आदि काटना भी निषिद्ध माना गया है।

जरुरतमंद लोगों को करें दान और शुभ काम करने से बचे।

सूतक काल में कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। ग्रंथों के अनुसार सूतक काल में पूजा पाठ और देवी देवताओं की मूर्तियों को भी छूने की मनाही है। इस दौरान कोई शुभ काम शुरू करना अच्छा नहीं माना जाता। सूर्य ग्रहण के अशुभ असर से बचने के लिए प्रभावित राशि वाले लोगों को ग्रहण काल के दौरान महामृत्युंजय मंत्र के जप करना चाहिए या सुन भी सकते हैं। इसके अलावा जरुरतमंद लोगों को अनाज दान करें। ग्रहण से पहले तोड़कर रखा हुआ तुलसी पत्र ग्रहण काल के दौरान खाने से अशुभ असर नहीं होता।

यह सूर्य ग्रहण निश्चित रूप से जरुरत से ज्यादा पानी लाएगा। भारत में कई जगह बाढ़ की स्थिति बनेगी। प्राकृतिक आपदा में भूकंप आने की भी प्रबल सम्भावना रहेगी। जो वैश्विक महामारी से समाज गुजर रहा इसका कई तरह से प्रभाव आने वाले समय में बना रहेगा। लोगों में आत्म विश्वासकी कमी होगी। युद्ध की स्थिति बनेगी।

क्या न करें?


सूर्य ग्रहण को नग्न आंखों से नहीं देखना चाहिए, क्योंकि सूर्य ग्रहण का बुरा प्रभाव आंखों पर पड़ता है. इसे नग्न आंखों से देखने से बचना चाहिए. नग्न आंखों से ग्रहण देखने पर आंखों को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए दूरबीन, टेलीस्कोप, ऑप्टिकल कैमरा व्यूफाइंडर से सूर्य ग्रहण को देखना सुरक्षित है।

सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्‍त एहतियात बरतनी होती है. बालक, बुजुर्ग और मरीजों को छोड़कर दूसरे लोगों को भोजन का त्‍याग करना चाहिए. खासकर, गर्भवती महिलाओं को घर में रहने और संतान गोपाल मंत्र का जाप करने के लिए कहा जाता है।

ग्रहण के समय गर्भवती स्त्री को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। क्योंकि ऐसे समय में सूर्य से हानिकारक तरंगे निकलती हैं जो कि मां और बच्चे की सेहत के लिए हानिकारक होती हैं। तेल मालिश नहीं करना चाहिए। सूतक काल में खासकर गर्भवती महिलाएं सावधानी जरूर रखें. ग्रहण काल के दौरान आपको कुछ खाना नहीं है और चाकू, छूरी का प्रयोग नहीं करना है. इस दौरान सब्जी फल आदि नहीं काटना है।

ग्रहण के दौरान लोगों को पानी पीने से भी बचना चाहिए. ग्रहण खत्म होने तक भोजन नहीं पकाया जाता है। ग्रहण काल में किसी भी नए कार्य का शुभारंभ न करें। ग्रहण काल की अवधि में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है. सूतक काल में पाठ पूजा की जाती है, देवी देवताओं की मूर्तिया छूना नहीं चाहिए।

सूतक के दौरान भोजन बनाना और भोजन करना वर्जित माना जाता है. भारी अनाज और सीरियल्स जैसे आटा, मैटा, काली दाल इन चीजों को पचाना पेट के लिए मुश्किल होता है और चूंकि ग्रहण के दौरान बदलाव हो रहा होता है ऐसे में हमारे शरीर के लिए इन चीजों को डाइजेस्ट करना और भी ज्यादा मुश्किल और तकलीफदेह हो सकता है। लिहाजा ग्रहण के दौरान ग्रेन्स और सीरियल्स का सेवन न करें।

कोई भी ऐसा खाद्य पदार्थ जो हमारे शरीर के तापमान को बढ़ा देता है और जिसे पचाना शरीर के लिए मुश्किल होता है उनका सेवन ग्रहण के दौरान नहीं करना चाहिए वरना डाइजेशन से जुड़ी दिक्कतें और बीमारियां हो सकती हैं। लिहाजा डीप फ्राइड और ऑइली फूड से परहेज करें।


नॉन वेज न खाएं


पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नॉन वेजिटेरियन फूड शरीर के तापमान को बढ़ा देता है क्योंकि इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है और शरीर के लिए इन्हें डाइजेस्ट करना मुश्किल हो जाता है। लिहाजा जो लोग पहले से बीमार हैं उन्हें तो अंडा और मीट से ग्रहण के दौरान दूर ही रहना चाहिए। खुला रखा हुआ पानी न पिएं। जी हां, वैसे तो ग्रहण के दौरान पानी पीने की भी मनाही रहती है। लेकिन अगर प्यास बर्दाश्त न हो रही तो पानी पी सकते हैं लेकिन वैसा पानी न पिएं जो काफी देर पहले से बिना ढके हुए खुला रखा हो। ग्रहण के दौरान होने वाले कॉस्मिक चेंज की वजह से पानी में भी रिऐक्शन हो सकता है। इसलिए अगर पीना ही हो तो ढंका हुआ पानी पिएं। देवी-देवताओं की प्रतिमा और तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए। सूर्य ग्रहण के दौरान फूल, पत्ते, लकड़ी आदि नहीं तोड़ने चाहिए। इस दिन न बाल धोने चाहिए ना ही वस्त्र। ग्रहण के समय सोना, शौच, खाना, पीना, किसी भी तरह के वस्तु की खरीदारी से बचना चाहिए। सूर्यग्रहण में बाल अथवा दाढ़ी नहीं कटवानी चाहिए, ना ही बालों अथवा हाथों में मेहंदी लगवानी चाहिए। सर्यग्रहण के दरम्यान उधार लेन-देन से बचना चाहिए. उधार लेने से दरिद्रता आती है और उधार देने से लक्ष्मी नाराज होती हैं.


क्या करें?

सूतक के समय पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए। ग्रहण के समय मानसिक रूप से मंत्रों का जाप कर सकते हैं। जैसे राम नाम, ऊँ नम शिवाय, सीताराम, श्री गणेशाय नम: आदि मंत्रों का जाप कर सकते हैं। आप चाहे तो अपने इष्टदेव का ध्यान भी कर सकते हैं।

ग्रहण काल के समय भगवान का ध्यान करना चाहिए. ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जप अवश्य करें,

भगवान के ध्यान के साथ ही मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए।

सूतक काल के पहले तैयार भोजन को खाने से पहले उसमें तुलसी के पत्ते डालकर शुद्ध करें। सूर्य ग्रहण लगने और खत्म होने के दौरान सूर्य मन्त्र ‘ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ’ के अलावा ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का धीमे-धीमे मगर शुद्ध जाप करें।

संयम के साथ जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है. ग्रहण काल के दौरान कमाया गया पुण्य अक्षय होता है. इसका पुण्य प्रताप अवश्य प्राप्त होता है। ग्रहण खत्म होने के बाद घर की सफाई करनी चाहिए। घर में स्थापित देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को स्नान करना चाहिए। पूजा-पाठ करना चाहिए। ग्रहण समाप्त हो जाने पर स्नान करके उचित व्यक्ति को दान करने का विधान है। ग्रहण के बाद पुराना पानी और अन्न फेक देना चाहिए। नया भोजन पकाकर खाये और ताजा पानी भरकर पिए।पूरा होने पर उसका शुद्ध बिम्ब देखकर ही भोजन करना चाहिए। ग्रहण के बाद गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरत मंदों को वस्त्र दान देने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।

ग्रहण के दौरान आपको धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हुए खुद को प्रसन्ऩचित अवस्थां में रखना चाहिए। रोग शांति के लिए ग्रहणकाल में आपको महामृत्युंोजय मंत्र का जप करना चाहिए। कांसे की कटोरी में घी भरकर उसमें चांदी का सिक्काु डालकर अपना मुख देखकर छायापात्र मंत्र पढ़ें। उसके बाद ग्रहण समाप्ति होने पर वस्त्र , फल, और दक्षिणा सहित ब्राह्मण को दान करने से रोग मुक्त़ होते हैं।


सूर्यग्रहण से जुड़े अंधविश्‍वास पर न करें विश्‍वास,


हिंदू धर्म में ग्रहण शब्‍द को बहुत बुरा माना जाता है। सूर्य ग्रहण और या चंद्र ग्रहण दोनों को लेकर हिंदू धर्म में कई अंधविश्‍वास हैं।


मान्‍यता: ग्रहण पड़े तो घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।


सत्‍य: क्‍योंकि सूर्य को ही धरती पर प्रकाश का स्रोत माना जाता है। प्राचीन समय में इलेक्ट्रिकसिटी नहीं हुआ करती थी इसलिए कहा जाता था कि अंधेरे में घर से बाहर नहीं निकला चाहिए। मगर आज प्रकाश लाने के ढेरों विकल्‍प ऐसे में ग्रहण पड़ने पर भी काम नहीं रुकते। जो लोग आज भी मानते हैं कि ग्रहण के वक्‍त घर से बाहर निकलने पर अनर्थ हो जाएगा वह अंधविश्‍वास के शिकार हैं।’


मान्‍यता: प्रेगनेंट महिलाओं पर ग्रहण का साया नहीं पड़ना चाहिए।


सत्‍य: ‘ग्रहण के वक्‍त जो किरणे पृथ्‍वी पर पड़ती हैं उसके कुछ साइडइफेक्‍ट होते हैं। इसलिए प्रेगनेंट महिलाओं को कुछ प्रकॉशन लेना चाहिए। विज्ञान ने इसके भी कई सारे विकल्‍प खोज लिए हैं। आज ग्रहण वाले दिन भी कई बच्‍चों का जन्‍म होता है और वह तंदुरुस्‍त भी होते हैं। डॉक्‍टर की सलाह से प्रेगनेंट महिलाओं चलना चाहिए न कि ग्रहण की दशा के अनुसार।’


मान्‍यता: ग्रहण में बना खाना जहर जैसा होता है।


सत्‍य: पहले के समय में कहा जाता था कि खाना हमेशा रौशनी में पकाया जाए ताकि साफ सुथरा पके और खाया भी रौशनी में चाहिए ताकि अन्‍न के साथ कुछ गलत चीज मुंह में न जाए। मगर आज ऐसा कुछ भी नहीं है। हर घर बिजली है और भरपूर रौशनी भी है। ऐसे में ग्रहण के वक्‍त खाना पकाया भी जा सकता है और खाया भी जा सकता है।


मान्‍यता: ग्रहण के वक्‍त भगवान का ध्‍यान करना चाहिए।


सत्‍य: अगर ग्रहण पूरे दिन रहेगा तो क्‍या पूरे दिन सारे काम छोड़ कर व्‍यक्ति को भगवान का ध्‍यान करना पड़ेगा।, ‘प्राचीन समय में ग्रहण पड़ने से प्रकाश में कमी होती थी इसलिए सारे काम ठप हो जाते थे। लोग खाली वक्‍त में क्‍या करें इसलिए उन्‍हें पूजा पाठ करने को कहा जाता था। मगर आज की जीवनशैली में ऐसा संभव नहीं है। इसलिए ग्रहण पड़ने पर पूजा पाठ करने लॉजिक आज के समय में फेल है।’


सूर्य ग्रहण को भूलकर भी खाली या नग्‍न आंखों से देखने की गलती नहीं करना चाहिये। यह आंखों के लिए बेहद नुकसानदायक है। इससे कुछ ही समय बाद आंखों की रोशनी जा सकती है। ग्रहण को देखने के लिए हमेशा सोलर चश्‍मा पहनें एवं जानकारों की सलाह के अनुसार ही सेफ डिवाइस का यूज करें।


सब्जी और फल वालों की रेहड़ियां ग्रहण के समय कहीं खुले मंे खड़ीहोगी। क्या उन खाने पीने वालेे सामानों को ग्रहण के बाद हम खरीद नहीं लेंगे ? क्या उसमें ग्रहण काल की सूर्य किरणोंका असर नहीं होगा। उल्टे हमें वह चीजें नहीं खानी चाहिए जिसमें सूर्य की रश्मियोंका प्रभाव हो।


विश्व व देश पर क्या रहेगा प्रभाव ?


ग्रहण के 41 दिन पहले और 41 दिन बाद धरती के वातावरण पर अक्सर देखा गया है। इस साल 6 ग्रहण हैं और 30 दिन के अंदर लग रहे हैं। इस कारण, भूकंप, अधिक वर्षा, बाढ़, प्राकृतिक आपदाएं, सीमा विवाद, राजनीमिक विवाद, हिंसक व धार्मिक उन्माद, आर्थिक मंदी , जनप्रतिनिधियों की जान को खतरा, महामारी के केसों में 30 दिन तक वृद्धि की आशंका रहेंगी।


ग्रहण का यह सामान्यराशि फल


आपकी कुंडली में दी गई चंद्र राशि के अनुसार ग्रहण का यह सामान्य फल हो सकता है, फिर भी हर व्यक्ति की ग्रह दशा आदि के अनुसार कई अन्य फलादेश भी हांेगे


1. मेष - सफलता के संकेत- धन लाभ का योग बन रहा है. इस राशि के लोगों के लिए सूर्यग्रहण विशेष लाभ देने वाला साबित होगा. सूर्यग्रहण किसी भी मामले में हानिकारक नहीं है बल्कि सभी मामलों में लाभ देने वाला साबित होगा


2. वृषभ - यह ग्रहण धन भाव में होगा. कर्ज न लें. दुश्मन बढ़ सकते हैं, जिसकी वजह से मानसिक तनाव में रह सकते है. वाणी पर नियंत्रण रखना है. अनाज का दान कर सकते हैं और चावल, आटा, गेहूं और दाल दे सकते हैं.


3. मिथुन - सूर्य ग्रहण आपकी ही राशि में लगने जा रहा है स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी परेशानी हो सकती है। आर्थिक स्‍तर पर आपके लिए सब कुछ अच्‍छा नहीं चलेगा और आपको काफी नुकसान भी हो सकता है।


4. कर्क - संपत्ति के मामले में हानि हो सकती है। कर्ज ना लेना है न ही देना है. खर्चे बहुत अधिक बढ़ सकते हैं गरीब व्यक्ति को आप अन्न, गुड़, तिल या वस्त्र का दान कर सकते हैं, जो आपके लिए बेहद अच्छा रहने वाला है.


5. सिंह - कहीं से लाभ प्राप्‍त होने के संकेत हैं। नए लोगों से मिलेंगे. और आपकी नए लोगों से दोस्ती बढ़ेगी. पैसे के मामलों में आपकी स्थिति काफी अच्छी रहेगी. यह सूर्य ग्रहण आपके लिए काफी फलदायी होने वाला है.


6. कन्‍या - ग्रहण लाभकारी है। सुखद परिणाम मिलेंगे।


7. तुला - वाणी पर नियंत्रण रखें। झगड़ा हो सकता है।

8. वृश्चिक - ग्रहण अष्टम भाव में होगा. हर प्रकार के संक्रमण से बचने की जरूरत है। निवेश करना आपके लिए अच्‍छा नहीं है। सांस से संबंधित बीमारियों को लेकर भी आपको खासा ध्‍यान देने की जरूरत है।

9. धनु - ग्रहण आपकी राशि के 7वें भाव में लगने जा रहा है। परेशानियों से मुक्‍त हो जाएंगे। उतनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। सेहत के मामले में इस वक्‍त पहले की तुलना में अधिक सावधान रहने की जरूरत है।

10. मकर - इस राशि के लोगों के लिए यह शुभ है।

11. कुंभ - चिंता बढ़ सकती है। किसी रिलेशनशिप में पड़ने से बचना चाहिए। पैसों के मामले में इस वक्‍त कोई खास लाभ नहीं मिलने वाला है। आर्थिक मामलों में आपकी स्थित सही रहेगी।


12. मीन - ग्रहण काफी फायदेमंद हो सकता है. रुके हुए काम पूरे हो जाएंगे. व्‍यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सूर्य ग्रहण अच्‍छे फल देने वाला साबित होगा. सूर्यग्रहण के प्रभाव से आपको स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी कोई समस्‍या पेश आ सकती है.

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