एससी, बीसी वर्ग के हितों पर कुठाराघात

चंडीगढ़, (गुरप्रीत)हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने हरियाणा की भाजपा-जजपा सरकार द्वारा रोस्टर सिस्टम से पदोन्नति करने संबंधी पत्र को वापस लिए जाने पर कड़ा रोष जताते हुए इसे एससी,बीसी वर्ग के हितों पर कुठाराघात करार दिया है। कुमारी सैलजा ने कहा कि प्रदेश सरकार ने नवंबर 2018 को पत्र जारी करके रोस्टर सिस्टम से प्रमोशन का प्रावधान किया गया था, लेकिन अब सरकार आरक्षण को खत्म करने की साजिश के तहत नए-नए पत्र जारी कर रही है। इसी कड़ी में 23 जून को पत्र जारी करके वर्ष 2018 के उस पत्र को वापस ले लिया है। इससे एससी, बीसी वर्ग के हजारों कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। पुराने आदेशानुसार एससी, बीसी कर्मचारियों को आरक्षण नीति के अनुसार रोस्टर प्रणाली के जरिए पदोन्नति मिलनी थी। परन्तु हैरानी की बात है कि इसके अनुसार हिदायतों को किसी भी विभाग में लागू ही नहीं किया गया और अब यह फैसला हरियाणा सरकार की आरक्षण विरोधी सोच का पर्दाफाश कर रहा है। कुमारी सैलजा ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार एससी, बीसी वर्ग को रोस्टर के मुताबिक प्रमोशन नहीं देना चाहती है। पिछले दिनों भी प्रदेश सरकार एसडीओ से एक्सईएन की प्रमोशन में रोस्टर सिस्टम लागू नहीं कर रही थी, जिस पर माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उन प्रमोशन पर रोक लगा दी थी, जिस पर आगामी तीन जुलाई को सुनवाई होनी है। लेकिन इसी बीच हरियाणा सरकार ने जो पत्र वापिस लिया है, इससे इस सरकार की आरक्षण व गरीब विरोधी मानसिकता का पता चलता है। जबकि उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए सभी श्रेणियों मे रोस्टर प्रणाली को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए। जिसके लिए क्लास वन व क्लास टू के नियमों में कुछ बदलाव किया जाना चाहिए था। वहीं वरीयता सूची बनाते समय आर्डर ऑफ मैरिट को ना बदलने की बाध्यता के नियम में बदलाव करके एससी बीसी वर्ग के उम्मीदवारों का उचित प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए आर्डर ऑफ मैरिट में बदलाव करने का प्रावधान किया जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा में क्लास वन व क्लास टू के प्रमोशन में आरक्षण नहीं है, लेकिन पूरे भारत में हरियाणा को छोड़कर सभी राज्यों में क्लास वन से लेकर क्लास-चार तक रोस्टर सिस्टम से प्रमोशन में आरक्षण दिया जा रहा है।कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार लगातार एससी, बीसी वर्ग के हितों पर कुठाराघात कर रही है और यह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सरकार अपने इस जनविरोधी फैसले को तुरंत वापस ले।

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