किसान-सरकार के बीच संकट को लेकर राजनीती हुई तेज़

कुमारी सैलजा ने लाठीचार्ज की निंदा की, विपक्ष ने की घेराबंदी चंडीगढ़ (अदिति) हरियाणा के कुरुक्षेत्र में किसानों और आढ़तियों की रैली को विफल करने हेतु सरकार ने कारवाही तो की परन्तु इसे भी राजनितिक रंगत मिल गई। समूचा विपक्ष इकट्ठा होकर सरकार की घेराबंदी करने लगा और निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने भी सरकारी तंत्र की विरुद्ध आवाज़ उठा। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष कुमारी सैलजा ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे किसान-मज़दूरों पर लाठीचार्ज किये जाने की कड़ी निंदा की है और आढ़तियों को रोकने के लिए की गई दमनपूर्ण कार्रवाई का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि किसानों के खिलाफ केंद्र सरकार के तीन अध्यादेशों के विरोध में प्रदेश कांग्रेस 21 सितंबर को प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन करेगी और महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देगी।रणदीप सुरजेवाला और अन्य नेताओं ने भी ट्वीट की भरमार लगा दी। साथ ही अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय महासचिव व हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने हरियाणा सरकार द्वारा तीनों अध्यादेश के विरोध में की जा रही किसान बचाओ मंडी बचाओ रैली पर प्रतिबंध लगाने की कड़े शब्दों में निंदा की और सरकार द्वारा प्रदेश में जगह-जगह पुलिस के माध्यम से किसान नेताओं व व्यापारी प्रतिनिधियों की धरपकड़ करना सरकार का निंदनीय कदम है। हरियाणा सरकार किसान व व्यापारियों के आंदोलन से इतना घबरा गई कि उन्होंने पूरे प्रदेश को सील कर दिया और कुरुक्षेत्र जिले को पुलिस छावनी में बदल दिया, जो प्रजातंत्र की हत्या है। प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग गर्ग ने कहा कि तीन अध्यादेश व सरकार की गलत नीतियों से देश व प्रदेश के किसान, आढ़ती व आम जनता में भारी रोष है। आज की रैली पर सरकार द्वारा रोक लगाना सरकार के कफन में कील साबित होगी। कुमारी सैलजा आज चंडीगढ़ में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी कृष्णा अलावरु के साथ पत्रकारों से विमर्श कर रही थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों को फसलों के लिए मिलने वाले न्यूनतम समर्थन मूल्य को खत्म करना चाहती है, साथ ही सीधे बड़ी कंपनियों के साथ डील करके आढ़तियों को भी खत्म करना चाहती है। लेकिन किसानों के लिए आढ़ती एटीएम की तरह हैं, जिनसे अपनी हर जरुरत के लिए वक़्त पड़ने पर आर्थिक मदद लेता रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कुछ बड़ी कंपनियों को फायदा देने के लिए किसान, मज़दूर और आढ़तियों को खत्म करना चाहती है। कृषि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और कोरोना काल में भी कृषि ने ही अर्थव्यवस्था को कुछ सहारा दिया है। इनमें 85 % छोटे किसान हैं। जब आढ़ती की बजाय बड़ी कंपनियां डील करेंगी तो क्या ये किसान उनसे डील कर पाएंगे। क्या आढ़ती को इस सिस्टम से बाहर कर देने से किसान अपनी ज़रूरत के वक़्त इन बड़ी कंपनियों से या बैंकों से आर्थिक मदद ले पाएंगे। कुमारी सैलजा ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी विरोध जताने का अधिकार है और जब इन किसान मजदूरों ने विरोध करना चाहा तो सरकार ने दमनपूर्ण कारवाई करके रात से ही उनकी धर पकड़ शुरू कर दी। इतना ही नहीं , इस जन विरोधी सरकार ने प्रदर्शन के लिए आये किसानों पर लाठीचार्ज भी किया। कांग्रेस इसकी निंदा करती है और किसान मज़दूरों और आढ़तियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करेगी। 21 सितंबर को प्रदेश के सभी मुख्यालयों ओर धरना प्रदर्शन होगा और महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देंगे। कांग्रेस सड़क पर ही नहीं सदन में भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरेगी।

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