गैर कानूनी है मेरा फसल मेरा ब्योरा पोर्टल !

पोर्टल का मकसद मात्र किसानो की फसलों को एम.एस.पी. MSP से वचित रखना :बैंस चंडीगढ़ (अदिति) आर.टी.आई. कार्यकर्ता राकेश कुमार बैंस के दावे यदि सही हैं तो हरियाणा सरकार द्वारा बड़े जोर शोर से चलाया जा रहा मेरा फसल मेरा ब्योरा पोर्टल न केवल गैर कानूनी है बल्कि किसानो के मौलिक अधिकारों पर प्रहार करने वाला है। उन्होने बताया कि उनके द्वारा मेरी फसल मेरे ब्योरे के संबंध में दो आवेदनो के तहत हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से 17 जानकारीया मांगी गई थी जोकि प्रदेश के किसानो के लिए बड़ी ही महत्वपूर्ण है। राकेश बैंस ने बताया मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 25.12.18 को मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल लांच किया था जिससे मनोहर सरकार ने अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में गिनया था जिसका उद्देश्य किसानो से फसल की पूरी जानकारी लेकर मंडी मे फसल बेचने में आ रही किसानो को दिक्कतों को दूर करना व फसलों की सुचारु रूप से खरीद करने में मदद मिल सके परंतु अब मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल ही किसानो के लिए जी का जंजाल बन गया है। उन्होने बताया की पिछले दिनो किसानो को अपनी फसल पोर्टल पर दर्ज करवाने को लेकर आई परेशानी को देखते हुए उन्होने विभाग से कई जंकरिया मांगी तब मिली जानकारी में कई खुलासे हुए जोकि हैरान कर देने वाले थे। राकेश बैंस ने बताया उन्होने हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से जानकारी मांगी थी इस पोर्टल को किस कानून की किस धारा के तहत बनाया व लागू किया गया इस बोर्ड का जबाब मेरी फसल मेरा ब्योरा को किसी कानूनी धारा के तहत बनाया या लागू नही किया गया। जब बोर्ड से किस किस फसल के लिए कब कब खोला जाता है कब कब बंद किया जाता इसकी समय सारणी व तालिका की जानकारी मांगी तब बोर्ड ने बताया की मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल को कृषि विभाग की सलाह पर खोला व बंद किया जाता है यानि कोई समय सारणी व तालिका नही । बोर्ड से इसके संगठनीय ढ़ाचे की जानकारी मांगी तब बोर्ड ने बताया की इस पोर्टल के संगठनीय ढ़ाचे व रूपरेखा की कोई लिखित जानकारी इस विभाग के पास नही है विजजयेन्द्र कुमार आईएएस एम.डी. होट्रोन , टी.एल. सत्यप्रकाश आई.ए.एस डी.जी. स्दीत, अजित बाला आई.ए.एस. निर्देशक कृषि विभाग, जे. गनेसन आई.ए.एस. मुख्य प्रबंधक हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, संजीव वर्मा आई.ए.एस. निर्देशक खाद्य एंव पूर्ति विभाग, आर.के. बैनीवाल सी.एम.ई.ओ. हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड की 20.12.2018 को हुई मीटिंग में इसे लागू करने का फ़ैसला लिया गया इसे 12 फसलों व 17 सब्जियों व 3 फलों की लागू किया गया है। बोर्ड से जानकारी मांगी गई की यदि अकुशल किसान किसी भी कारण से पोर्टल पर अपनी फसल का ब्योरा दर्ज नही करवा पाया तब वह अपनी फसल मंडी बेच सकता है या नही बेच सकता है तो किस प्रकार बेच सकता है जिसके जबाब में बोर्ड ने बताया की पोर्टल पर दर्ज नही होने के उपरांत किसान अपनी फसल को सरकारी खरीद में नही बेच सकता है लेकिन किसान अपनी फसल को निजी खरीददार को मंडी में बेच सकता है जोकि सीधे सीधे किसानो की फसल को एम.एस.पी. पर बिकने से रोकता है या ये कहे की गलती किसी की भी हो यदि पोर्टल पर किसान का फसल का विवरण दर्ज नही है उस हालत में किसान को एम.एस.पी. से वंचित रहना होगा एक सवाल के जबाब में बोर्ड ने जानकारी दी की किसान को मेरी फसल मेरा ब्योरा के पोर्टल पर दर्ज विवरण का कोई भी दस्तावेज किसान को बोर्ड की तरफ से जारी नही किया जाता तब किसान किसी प्रकार अपने विवरण को बता पाएगा की उसका ब्योरा दर्ज था यह अति गंभीर है। राकेश बैंस ने जानकारी देते हुए बताया की जब बोर्ड से किसानो की शिकायतो के समाधान के लिए बनाए गए शिकायत केन्द्रो की जानकारी मांगी तब बोर्ड ने बताया की रबी सीजन 2020 की खरीद प्रक्रिया गेंहू ओर सरसों की खरीद के लिए टोल फ्री नंबर 1800-180-2060 के मध्यम से अपनी शिकायत ठीक करवा सकेगे जोकि कोरोना काल के लिए बनाया गया था मंडियो में कोई शिकायत केंद्र या किसान की समस्या के समाधान की जानकारी नही दी । आर. टी. आई. कार्यकर्ता ने बताया मंडीकारण बोर्ड को फसल पैदावार / उत्पादन की सही जानकारी किस प्रकार मिलती है ताकि खरीद व्यवस्था ठीक प्रकार से व सुचारु रूप से चल सके इसकी जानकारी मांगी गई तब बोर्ड ने बताया की इसकी जिम्मेदारी कृषि विभाग की है यह व्यवस्था तो पोर्टल के लागू होने से पहले की है तब पोर्टल का मुख्य मकसद जोकि किसान से उत्पादन/ पैदावार की जानकारी लेकर उसकी खरीद व्यवस्था सुचारु रूप से ठीक करने का कैसे पूरा होगा । बैंस ने बताया की बोर्ड से जानकारी मांगी गई इस पोर्टल पर विवरण दर्ज करने की जिम्मेदारी किसकी है तब बोर्ड ने बताया की किसान की जिसको सरकार ने अकुशल माना हुआ है अकुशल व्यक्ति किस प्रकार सही जानकारी दर्ज करवा पाएगा यह समझ से परे है । राकेश कुमार ने कहा हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड से आई सभी जंकारियों से यह स्पष्ट हो गया है की मेरी फसल मेरा ब्योरा किसानो के हितों के लिए नही बल्कि किसानो को फसल के एम.एस.पी. से दूर रखने के लिए बनाया गया है। बीजेपी सरकार ने किसानो को जो उद्देश्य दिखाकर पोर्टल लागू किया गया था उससे उलट है भारतीय किसान यूनियन इस पोर्टल के संबंध में कृषि विचारो से संबधित वकीलों से विचार विमर्श कर इस पोर्टल को मंडियो से हटाने के लिए जल्द ही माननीय हाईकोर्ट का दरवाजा खटगाएगी ।

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