फेथ हॉस्पिटल का उद्घाटन हुआ, होगा मनोरोग व नशामुक्ति का उपचार

चंडीगढ़ (अदिति) : मनोरोग उपचार व नशामुक्ति के लिए समर्पित सेक्टर 21 में स्थित फेथ हॉस्पिटल का शुक्रवार को उद्घाटन हुआ। उद्घाटन के दौरान बोलते हुए, डॉ दमनजीत कौर, एमडी-मनोचिकित्सा और सह-संस्थापक ने कहा कि अस्पताल डिप्रेशन, एंग्जायटी , एकाग्रता की समस्या , समाज से दूरी बनाना , ब्रेन फ़ॉग , बढ़ती चिंता, भूख में कमी, हैल्युसिनेशन , आत्महत्या की प्रवृत्ति , पर्सनल हाइजीन नजरअंदाज करना, अपने आसपास के लोगों और स्थितियों पर व्यामोह सहित विकारों के लिए आवश्यक सेवाएं प्रदान करेगा। डॉ अमित, एमडी-रेडियोलॉजी और अस्पताल के संस्थापक निदेशक ने कहा कि हम मानसिक रूप से बीमार और ड्रग एडिक्ट मरीजों को अत्याधुनिक इनडोर सुविधाओं में सस्ती और 24*7 उपचार प्रदान करेंगे। डॉ दमनजीत ने इस अवसर पर बोलते हुए कहा कि कोरोना वायरस ने जीवन के कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य भी शामिल है। आज के समय में हम में से कई लोग तनाव, अलगाव, नौकरी छूटने का डर, बीमारी की आशंका , भय और नुकसान का सामना कर रहे हैं। महामारी के दौरान, कई लोग अनिद्रा, डिप्रेशन, चिंता आदि का सामना कर रहे हैं व शराब, तम्बाकू का अधिक उपभोग करने के लिए मजबूर हैं। एक आंकड़े के अनुसार, महिलाओं में डिप्रेशन पुरुषों की तुलना में दोगुनी होती हैं। अध्ययन में पाया गया है कि लॉकडाउन में घरेलू हिंसा व काम का बोझ बढऩे से महिलाओं में डिप्रेशन बढ़ गया है। उन्होंने आगे कहा कि ऑनलाइन स्कूली शिक्षा के कारण बच्चे भी कठिन दौर से गुजर रहे हैं। इंटरनेट एक्सपोजर के कारण बच्चे साइबर क्राइम आदि में फंस रहे हैं। स्क्रीन का समय बढ़ गया है जिससे छात्रों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है। किसी के पास घर में वास्तविक स्कूल जैसी बुनियादी संरचना नहीं हो सकती है जो शिक्षा को समझने बहुत प्रभावित करती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भारत में साइकेट्रिस्ट और साइकोलॉजिस्ट की भारी कमी है। भारत में प्रति 1,00,000 आबादी पर 0.3 साइकेट्रिस्ट 0.07 साइकोलॉजिस्ट हैं और जबकि वांछनीय संख्या 3 से ऊपर है। डब्ल्यूएचओ ने यह भी अनुमान लगाया कि लगभग 7.5 प्रतिशत भारतीय मानसिक विकारों से पीडि़त हैं और इस साल के अंत तक यह अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग 20 प्रतिशत भारतीय मानसिक बीमारी से पीडि़त होंगे। 56 मिलियन भारतीय डिप्रेशन से पीडि़त हैं और अन्य 38 मिलियन भारतीय एंग्जायटी डिसऑर्डर से पीडि़त हैं।

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