बीस हजार स्कूलों में 12 लाख कर्मियों को नहीं मिला वेतन

चंडीगढ़, (अदिति) हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ व इंटीग्रेटेड प्राइवेट स्कूल वैलफेयर सोसाइटी ने हरियाणा सरकार ने लॉकडाउन अवधि के दौरान स्कूल बसों के टैक्स व बिजली बिल माफ करने की मांग की है। सोमवार को चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू, उपप्रधान सौरभ कपूर व संरक्षक तेलूराम ने बताया कि प्राइवेट स्कूलों की एक और बड़ी समस्या अब स्कूल बस बन गई हैं जिनका किराया नहीं मिलने से बैंक लोन की किश्तें व बीमा भी भरने में सभी स्कूल असमर्थ हो गए हैं। सरकार ने कमर्शियल वाहनों का दो महीने का टैक्स तो माफ कर दिया है परंतु स्कूल बसों को कोई राहत नहीं दी गई है। हरियाणा सरकार द्वारा एसएलसी मामले में फैसला बदलने का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि निजी स्कूल संचालकों के सामने फीस को लेकर गफलत वाला माहौल बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ चुनिंदा स्कूलों को छोडक़र अन्य स्कूलों में पांच प्रतिशत फीस भी जमा नहीं हुई जिस कारण लगभग 20,000 स्कूलों के लाखों कर्मचारियों का वेतन स्कूल पिछले तीन महीने से नहीं दे पाए। जिसके चलते उन्होंने सरकार से मांग कि है कि सक्षम एवं असक्षम अभिभावकों की परिभाषा को साफ करते हुए फीस जमा करवाने के निर्देश दिए जाएं। निजी स्कूलों के लिए तीन माह के राहत पैकेज की मांग करते हुए कुंडू व कपूर ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर निजी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के खाते में भी हर माह 1125 रुपये डाले जाएं। नियम 134 के तहत क्षतिपूर्ति की बकाया राशि जारी करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों की स्थाई मान्यता को दस वर्ष पूरे हो चुके हैं उनकी मान्यता को रिन्यू करने की बजाए एफिडेविट लेकर मान्यता प्रदान कर दी जाए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस समय 3200 के करीब अस्थाई मान्यता प्राप्त स्कूल हैं। जिन्हें कोरोना के चलते एक साल की एक्सटेंशन प्रदान की जाए। संघ ने इस बात की मांग की है कि राज्य सरकार, सरकारी स्कूलों की तरह निजी स्कूलों को भी पूरी तरह से सैनीटाईज कर उनके संभावित आर्थिक बोझ को कम करें।

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