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  • Manpreet Badal should quit for lopsided 6th pay panel report,BJP will upgrade recommendations

    Chandigarh, (Gurpreet) BJP national general secretary Tarun Chugh today flayed the Amarinder Singh government for accepting lopsided recommendations of the sixth pay commission and inciting the government employees to go on strike. In a statement, Chugh demanded resignation of state Finance Minister Manpreet Badal for having failed to vet the recommendations of the pay commission in view of the hardships faced by the government employees and said if the BJP comes to power in the state, it would revise the recommendations of the pay commission to help the employees. He said the Amarinder government's insensitivity towards the demands of doctors at a time when they were fighting Covid as frontline warriors, was reprehensible. Chugh said the state government should have held discussions with the government employees to hear their grievances before implementing the pay commission report. "But the chief minister and the finance minister seemed to be plotting more for political gains out of it than to give real relief to the employees", Chugh said. Given the kind of governance in Punjab, Chugh said, there is a gloomy atmosphere all around. He said if liquor mafias, sand mafias and transport mafias are running the state the government employees should not have had much hope from the Amarinder government.

  • छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को सरकारी कर्मचारियों की सहमति व चर्चा के बिना स्वीकार करना निंदनीय

    6 वे कमीशन में कर्मचारियों को वास्तविक राहत देने के बजाय कैप्टेन सरकार ने राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की है जो भी असफल रही : चुघ चंडीगढ़ (गुरप्रीत) भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को सरकारी कर्मचारियों की सहमति के बिना स्वीकार करने की निंदा करते हुए कहा कि पंजाब सरकार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लागु करने में कर्मचरियो के साथ विचार विमर्श करने में असफल रही है। चुग ने राज्य के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों की कठिनाइयों के मद्देनजर वेतन आयोग की सिफारिशों की समीक्षा करने में विफल रहे है इस समीक्षा में ना कर्मचारियों से पूछा गया है, ना ही उनके सुझाव वेतन आयोग कि रिपोर्ट में शामिल किये गए है। चुग ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो कर्मचारियों की मांगो के अनुसार छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को अक्सर शह लागु करेंगी। चुग ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के समय में डॉक्टरों की मांगों के प्रति अमरिंदर सरकार का रवैया बहुत ही असंवेदनशील था ओर इस 6 वे कमिशन की रिपोर्ट में ना ही डॉक्टरों की चिंता की है और ना ही स्वास्थ्य कर्मचारियों। चुघ ने कहा कि राज्य सरकार को वेतन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने से पहले सरकारी कर्मचारियों के साथ उनकी शिकायतों को सुनने के लिए चर्चा करनी चाहिए थी। चुग ने कहा, "अब ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री कर्मचारियों को वास्तविक राहत देने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने की असफल कोशिश कर रहे है ।" चुग ने कहा कि पंजाब में जिस तरह का शासन है, उसे देखते हुए चारों तरफ सभी वर्गों में असंतोष का माहौल है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य में शराब माफिया, रेत बजरी माफिया, ठेकेदार माफ़िया , और परिवहन माफिया चलाये जा रहे हैं ऐसे माहौल में सरकारी कर्मचारियों को कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार से ज्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए थी

  • चौटाला का अगला लक्ष्य चुनाव मैदान में उतरना

    चंडीगढ़ (अदिति) जे बी टी टीचर भर्ती घोटाले में मिली सजा पूरी कर चुके हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला की रिहाई के बाद हरियाणा की राजनीती में कई कयास लगाए जा रहे हैं। हालाँकि हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अपने दादा और पिता को षड्यंत्र के तहत फ़साने का आरोप लगाया परन्तु विपक्ष ने श्री चौटाला की रिहाई पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी। अब चर्चा ये है किश्री चौटाला का अगला लक्ष्य चुनाव मैदान में उतरना है और कानून के अनुसार वह चुनाव लड़ भी सकते हैं बशर्ते चुनाव आयोग उनको राहत दे , लेकिन इस के लिए श्री चौटाला को एक याचिका दायर करनी पड़ेगी । चौटाला अगर याचना करें तो चुनाव आयोग चुनाव न लड़ पाने की अवधि को कम कर सकता है या उनको चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध को पूरी तरह खत्‍म कर सकता है। ये है नियम, जिसके तहत चौटाला लड़ सकते हैं चुनाव लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 8(1) के अनुसार, रिहाई से 6 साल की अवधि तक यानी जून 2027 तक ओपी चौटाला चुनाव नहीं लड़ सकते। लेकिन, चौटाला के पास उक्त कानून की धारा-11 के तहत अपनी 6 वर्ष की अयोग्यता अवधि को कम करने या खत्म करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग के पास अर्जी दायर करने का विकल्प है। इसके लिए 3 सदस्यीय चुनाव आयोग कानूनन सक्षम है। सितंबर 2019 में आयोग ने सिक्किम के वर्तमान सीएम प्रेम सिंह तमांग के चुनाव लड़ने के लिए लगी 6 वर्ष की अयोग्यता अवधि को घटाकर एक वर्ष एक माह कर दिया था। वे भी भ्रष्टाचार में दोषी ठहराए गए थे।

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